Katihar News: बिहार के कटिहार जिले में एएनएम कॉलेज की छात्राओं को अपनी समस्याओं के निवारण के लिए सीधे जिलाधिकारी के पास पहुंचना पड़ा। मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचीं इन छात्राओं ने हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था, सुरक्षा में कमी और शिक्षकों के अनुचित व्यवहार की शिकायतें दर्ज कराईं। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने छात्राओं की बात सुनने के लिए एक अनूठी पहल की, वे खुद जमीन पर बैठकर उनकी परेशानियां समझने की कोशिश की।
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हॉस्टल की बदहाली और सुरक्षा का मुद्दा
छात्राओं ने बताया कि हॉस्टल परिसर में साफ-सफाई की स्थिति लंबे समय से संतोषजनक नहीं है। परिसर के चारों ओर झाड़ियां और घास उग आने से उन्हें आने-जाने में कठिनाई होती है, और कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके अतिरिक्त, छात्राओं ने हॉस्टल की सुरक्षा को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की, क्योंकि वहां पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, जिससे उनमें असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
छात्राओं ने कॉलेज के कुछ शिक्षकों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि उन्हें शिक्षकों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता और उनका व्यवहार भी कई बार ठीक नहीं रहता। इन शिकायतों को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया, क्योंकि ये सीधे तौर पर छात्राओं के शैक्षणिक माहौल और सुरक्षा से जुड़ी थीं।
डीएम ने तुरंत दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने छात्राओं की समस्याओं को विस्तार से सुना और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों से तुरंत जवाब तलब किया। उन्होंने सिविल सर्जन को छात्राओं की शिकायतों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। हॉस्टल की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और अन्य बुनियादी सुविधाओं को तत्काल दुरुस्त करने के लिए कदम उठाने को कहा गया।
शिक्षकों के खिलाफ मिली शिकायतों के संबंध में भी आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया भी शुरू करने की बात सामने आई है, ताकि छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।
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जिलाधिकारी के इस त्वरित और संवेदनशीलता भरे कदम से छात्राओं में उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि दिए गए निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से होता है और कटिहार एएनएम कॉलेज के हॉस्टल की स्थिति में कब तक सुधार आता है। यह घटना अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के लिए भी एक मिसाल पेश कर सकती है कि जन समस्याओं को कैसे सीधे और प्रभावी ढंग से सुना जाए।







