
T20 World Cup India: जब देश की आत्मा जश्न में डूबी थी और हर जुबां पर ‘इंडिया-इंडिया’ का नारा था, ठीक उसी पल क्रिकेट के मैदान से निकली विजय की गूंज पर राजनीति के बादल मंडराने लगे। भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद मंदिर दर्शन पर उठा एक सवाल, अब एक बड़ी सियासी बहस का रूप ले चुका है।
T20 World Cup India: ‘खेल में सियासत क्यों?’, हरभजन सिंह ने कीर्ति आज़ाद को लताड़ा
भारतीय क्रिकेट टीम ने हाल ही में T20 World Cup India जीतकर इतिहास रच दिया। इस शानदार जीत से पूरे देश में उत्साह का माहौल है, लेकिन इसी बीच एक राजनीतिक विवाद ने भी जन्म ले लिया है। 1983 वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य और अब राजनेता कीर्ति आज़ाद ने टीम के मंदिर जाने पर सवाल उठाए, जिसके बाद पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने उन्हें करारा जवाब दिया है।
जीत के बाद, भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच और ICC चीफ जय शाह के साथ, पास के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे। इस घटना ने कीर्ति आज़ाद का ध्यान खींचा, जिन्होंने सोशल मीडिया पर भारतीय टीम की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि ट्रॉफी को मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं ले जाया गया, जबकि जीत पूरे भारत की है और किसी एक धर्म विशेष की नहीं। इस बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी, और यह एक बड़ी धर्म पर सियासी तकरार का रूप ले लिया है।
T20 World Cup India: मंदिर दर्शन पर बवाल क्यों?
आज़ाद के इन बयानों की कड़ी निंदा हुई। युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन ने तो इस सवाल को टालते हुए पत्रकारों से ‘बेहतर सवाल’ पूछने की अपील तक कर डाली थी। अब, भारत के पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी इस विवाद में अपनी राय रखी है और आज़ाद की टिप्पणियों की तीखी आलोचना की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
कीर्ति आज़ाद के सवाल पर हरभजन का पलटवार
हरभजन सिंह ने एक प्रमुख समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “यह अजीब है कि वह (कीर्ति आज़ाद) इस पर राजनीति करके क्या हासिल करना चाहते हैं। भारतीय टीम ट्रॉफी को मंदिर, मस्जिद, चर्च, जहां चाहे ले जा सकती है। अगर खिलाड़ियों ने अपने भगवान से कुछ मांगा है और उनकी मनोकामना पूरी होने के बाद उन्होंने अपने विश्वास का इजहार किया है, तो इसमें क्या गलत है?” हरभजन ने आगे कहा कि किसी को भी इस तरह के धार्मिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने आज़ाद को सलाह दी कि वे देश की ऐतिहासिक जीत पर खुशियां मनाएं, न कि ऐसी स्थितियों पर राजनीति करने की कोशिश करें। हरभजन सिंह ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “साथी क्रिकेटरों से ऐसी बातें सुनना अच्छा नहीं लगता। शायद वे खेल से ज़्यादा राजनीति को पसंद कर रहे हैं। यह और भी दुखद है कि वह खुद एक खिलाड़ी रहे हैं। देश ने वर्ल्ड कप जीता है। खुश रहिए, जश्न मनाइए, लेकिन आप राजनीति करने में व्यस्त हैं।”
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हरभजन सिंह की दो टूक: जीत का जश्न मनाएं, राजनीति नहीं
हरभजन ने धर्मनिरपेक्षता के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “हम अपने धर्म में कहते हैं कि सभी धर्म एक जैसे हैं। भगवान अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन रास्ता एक ही है। अगर खिलाड़ी मंदिर, मस्जिद या चर्च गए, तो सब एक ही है। यह उनका निजी धर्म है और आपको इस पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से खिलाड़ियों का व्यक्तिगत मामला है कि वे अपनी जीत को किस तरह से मनाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। टीम की यह शानदार जीत करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
एक खिलाड़ी और पूर्व राजनेता के बीच इस धर्म पर सियासी तकरार ने क्रिकेट जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मचा दी है। जहाँ एक तरफ देश T20 वर्ल्ड कप जीत के जश्न में डूबा है, वहीं दूसरी तरफ यह विवाद लगातार गरमाता जा रहा है।



