हिंदू धर्म नेताओं के लिए सबसे आसान टारगेट बन गया है। चाहे सनातन धर्म पर अटैक् हो या रामचरित्र मानस पर या फिर पेटिंग में गणेश, सरस्वती को लेकर विवाद खड़ा करना यह अब आदत में शुमार है। इसपर कोई रोक भी नहीं है। ताजा मामला जो विवादों से भरा है राजद के विधायक फतेह बहादुर सिंह हिंदू धर्म को टारगेट कर सुर्खियों में आ गए हैं।
विधायक ने दुर्गा पूजा पंडाल को नाजायज खर्च बता दिया। कहा कि यह सारा खर्च बेकार है। जब दुर्गा का कोई इतिहास ही नहीं है तो लोग क्यों इतना खर्च करते हैं। मां दुर्गा को लेकर आरजेडी विधायक ने कहा कि अगर वह तीनों लोक की देवी थीं तो क्या भारत में ही तीनों लोक है।
अगर दुर्गा देवी रहतीं और इनका अवतार हुआ रहता तो ये भारत में ही क्यों पूरे विश्व में क्यों नहीं। मैं कहता हूं कि हम कौन से हिंदू हैं। जिन मनुवादियों ने देवताओं को काल्पनिक बनाया, उन्होंने ही ओबीसी एससी-एसटी को शूद्र बना दिया।
कहा कि जब ब्रिटिश सरकार ने भारत को गुलाम बनाया तो मां दुर्गा कहां थीं। इस सवाल पर कि क्या आप दुर्गा को देवी मानते हैं। इस पर आरजेडी विधायक ने कहा कि ये काल्पनिक कहानी है। मैं मान लेता, लेकिन मेरे पास साक्ष्य है।
विधायक ने कहा कि मनुवादियों के अनुसार देश में 33 करोड़ देवी-देवता हैं लेकिन जब भारत गुलाम हुआ, ब्रिटिश सरकार भारत में आई और गुलाम बनाने का काम किया उस समय भारतीयों की संख्या 30 करोड़ थी।
मैं उन मनुवादियों से पूछना चाहता हूं जिन्होंने ये लिखा कि महिषासुर की करोड़ों सेना के साथ मां दुर्गा ने लड़ाई लड़ी और महिषासुर का नरसंहार कर दिया। जब मुट्ठी भर ब्रिटिश सरकार ने भारत को गुलाम बनाया तो मां दुर्गा क्या कर रही थीं? दस हाथ का औजार कहां था।
विधायक ने दुर्गा पूजा जैसे आयोजक को फिजूल खर्ची बताते हुए दुर्गा रुप को काल्पनिक बताया है। विधायक ने कहा कि दुर्गा एक काल्पनिक कहानी है। वो उस कहानी का महज एक पात्र है। मैं मान लेता यदि दुर्गा जी या हमारे देश में मनुवादी के अनुसार 33 करोड़ देवी देवता हैं। लेकिन, जब भारत गुलाम हुआ उस समय भारतीय की संख्या 30 करोड़ थी और देवी–देवताओं की संख्या 33 करोड़।

















