मधुबनी, देशज टाइम्स: जिले में धान अधिप्राप्ति की धीमी रफ्तार पर अब प्रशासनिक हंटर चला है। जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने समीक्षा बैठक के दौरान निष्क्रिय पड़े पैक्सों की संख्या पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिससे हड़कंप मच गया है।
DM की कड़ी चेतावनी: 2 दिन में सक्रिय हों सभी पैक्स
24 नवंबर, 2025 को जिलाधिकारी आनंद शर्मा की अध्यक्षता में धान अधिप्राप्ति कार्य की समीक्षा बैठक हुई। इस दौरान पता चला कि जिले में कुल 143 पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ) चिन्हित किए गए हैं, लेकिन इनमें से अभी तक केवल 56 पैक्स ही क्रियाशील हो पाए हैं। इस गंभीर स्थिति पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने बेनीपट्टी, बिस्फी और राजनगर के प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने साफ शब्दों में कहा कि शेष सभी निष्क्रिय पैक्सों को अगले दो दिनों के भीतर हर हाल में क्रियाशील किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि किसानों के हितों से जुड़े किसी भी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, किसानों को उनके धान की खरीद का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया।
धीमी रफ्तार से खरीद, मात्र 140 किसान लाभान्वित
समीक्षा बैठक में यह भी सामने आया कि जिले में अभी तक केवल 140 किसानों से कुल 961 मीट्रिक टन धान की खरीद ही हो पाई है। यह आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य और किसानों की संख्या के मुकाबले काफी कम है, जो चिंता का विषय बना हुआ है। इस धीमी रफ्तार को देखते हुए जिलाधिकारी ने अधिप्राप्ति कार्य में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
बैठक में निबंधित मिलों के सत्यापन और संबद्धता के कार्य को भी तुरंत पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य यह है कि धान अधिप्राप्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुचारू तरीके से संचालित किया जा सके।
धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य और पंजीकरण प्रक्रिया
किसानों को जानकारी दी गई कि साधारण धान के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,369 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। धान अधिप्राप्ति की अवधि 1 नवंबर, 2025 से शुरू होकर 28 फरवरी, 2026 तक तय की गई है।
जो किसान अपना धान बेचना चाहते हैं, वे कृषि विभाग के पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अधिप्राप्ति कार्य को गति दें और यह सुनिश्चित करें कि किसानों को उनकी उपज बेचने में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

















