
Government Scheme: दरभंगा देशज टाइम्स। सरकार जब योजनाओं की बारिश करती है तो कभी-कभी छाता गलत सिर पर तन जाता है। दरभंगा में भी कुछ ऐसा ही हुआ, जहां महिलाओं के हक का पैसा पुरुषों के खाते में पहुंच गया और अब विभाग वसूली के लिए नोटिस भेज रहा है। यह मामला बिहार के दरभंगा जिले के जाले विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अहियारी गांव का है, जहां सरकारी तंत्र की एक बड़ी लापरवाही ने गरीब परिवारों को मुश्किल में डाल दिया है।
Government Scheme में हुई बड़ी चूक, पुरुष खा गए महिलाओं का हक़
मामला मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10,000 रुपये की सहायता राशि दी जानी थी। लेकिन, विभागीय गलती के कारण यह राशि गांव की महिलाओं के बजाय कुछ पुरुषों के बैंक खातों में चली गई। जब तक इस गड़बड़ी का पता चलता, तब तक काफी देर हो चुकी थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अब तक की छानबीन में तीन ऐसे पुरुषों की पहचान हुई है, जिनके खाते में गलती से यह रकम पहुंची। ये तीनों ही बेहद गरीब और दिव्यांग हैं। इन लाभुकों के नाम हैं:
- नागेंद्र राम
- बलराम सहनी
- राम सागर कुमार
इन लोगों ने खाते में आई राशि को सरकारी मदद समझकर दीपावली और छठ जैसे त्योहारों में खर्च कर दिया। कुछ ने तो रोजगार की उम्मीद में बत्तख और बकरी भी खरीद ली।
पैसा खर्च कर चुके लाचार लाभुक, अब कहां से करें वापसी?
त्योहारों और छोटे-मोटे रोजगार में पैसा खर्च कर चुके इन पुरुषों के सामने अब धर्मसंकट की स्थिति है। उनकी आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वे 10,000 रुपये की रकम विभाग को लौटा सकें। एक लाभुक नागेंद्र राम ने अपनी बेबसी जाहिर करते हुए कहा, “हम गरीब और विकलांग आदमी हैं। सोचा सरकार ने मदद भेजी है तो खर्च कर दिया। अब हम पैसे कहां से लौटाएं? सरकार से गुहार है कि इस राशि को माफ कर दिया जाए।”
इस बीच, जाले प्रखंड जीविका के बीपीआईयू (प्रखंड परियोजना प्रबंधक) की ओर से इन खाताधारकों को पत्र जारी कर राशि वापस जमा करने का आदेश दिया गया है। विभाग ने इस वित्तीय अनियमितता की पुष्टि करते हुए वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे ग्रामीणों में भारी असमंजस और नाराजगी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह के पत्र कई और लोगों को भी मिले हैं, जिससे लगता है कि गड़बड़ी का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।
कैमरे पर बोलने से बच रहे अधिकारी
जब इस पूरे मामले पर जीविका के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, ऑफ-कैमरा बातचीत में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि भुगतान प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि गलत तरीके से हस्तांतरित हुई राशि की वसूली के लिए ही कुछ लोगों को पत्र भेजे गए हैं।
यह घटना सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ जहां सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसी लापरवाही गरीबों के लिए ही मुसीबत का सबब बन रही है। यह पूरा मामला सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।







