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फ़रवरी, 12, 2026
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पौष अमावस्या 2025: पितरों की कृपा बरसाने वाली पौष अमावस्या

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Paush Amavasya 2025: हिंदू धर्म में पौष अमावस्या को पितरों को याद कर तर्पण करने के लिए बेहद शुभ माना गया है। यह वह पवित्र तिथि है जब हमारे पूर्वज पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप में उपस्थित होते हैं और अपने वंशजों द्वारा किए गए दान-पुण्य से संतुष्ट होते हैं। यह दिन पितृ ऋण चुकाने और उनकी कृपा प्राप्त करने का अनुपम अवसर है।

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पौष अमावस्या 2025: पितरों की कृपा बरसाने वाली पौष अमावस्या

पौष माह की अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और दान करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है। ऐसी मान्यता है कि इस पावन तिथि पर किए गए दान से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं, बल्कि व्यक्ति को पितृदोष से भी मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह दिन उन सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पूर्वजों को सम्मान देना चाहते हैं और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को धन्य बनाना चाहते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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पौष अमावस्या 2025 पर दान का महत्व

पितरों की शांति और मोक्ष के लिए पौष अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष विधान है। इस दिन श्रद्धापूर्वक दान करने से व्यक्ति के सभी पापों का शमन होता है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन किया गया दान सीधे पितरों तक पहुंचता है और वे तृप्त होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं। पितरों का आशीर्वाद जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और परिवार में खुशहाली लाता है। इसलिए इस दिन सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करना चाहिए।

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क्या दान करें?

* तिल: काले तिल का दान पितरों को विशेष प्रिय है। इससे पितरों को शांति मिलती है और पितृदोष का प्रभाव कम होता है।
* वस्त्र: गरीबों और जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र, कंबल या अन्य गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* अनाज: गेहूं, चावल, दाल आदि अनाजों का दान करने से घर में अन्नपूर्णा का वास होता है और कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।
* गुड़ और घी: गुड़ और घी का दान भी इस दिन शुभ माना जाता है। इससे पितरों को संतुष्टि मिलती है।
* दीपदान: नदी या सरोवर में दीपदान करने से भी पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्ग प्रशस्त होता है।
* जलपात्र: मिट्टी या धातु के जलपात्र का दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है।

इन वस्तुओं का दान किसी योग्य ब्राह्मण, मंदिर में या किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को किया जा सकता है। दान करते समय मन में श्रद्धा और पितरों के प्रति सम्मान का भाव होना चाहिए।

निष्कर्ष और उपाय:

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पौष अमावस्या का दिन पितरों को स्मरण करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर है। इस दिन किया गया तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य न केवल हमारे पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करता है, बल्कि हमारे जीवन को भी सुख-समृद्धि से भर देता है। पितरों की प्रसन्नता से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यदि आप पितरों की कृपा चाहते हैं, तो इस दिन श्रद्धापूर्वक दान और तर्पण अवश्य करें।

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