बड़ी खबर! बिहार में अब 50 लाख तक घर बनाने पर कोई सेस नहीं, सीधे जेब में बचेंगे पैसे
Bihar Construction Cess: बिहार में अपना आशियाना बनाने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। सरकार ने मकान, दुकान और अन्य इमारतों के निर्माण पर लगने वाले श्रमिक कल्याण सेस (उपकर) के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब 50 लाख रुपये तक की लागत वाले निर्माण कार्यों पर 1 प्रतिशत का सेस नहीं वसूला जाएगा। यह फैसला श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने लिया है, जिससे लाखों लोगों को सीधे तौर पर वित्तीय राहत मिलेगी।
Bihar में पहले 10 लाख रुपये से अधिक के निर्माण पर यह 1 प्रतिशत सेस लिया जाता था। लेकिन, नई व्यवस्था के तहत यह सीमा बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। इसका सीधा अर्थ है कि अब सिर्फ 50 लाख रुपये से अधिक लागत वाले निर्माण कार्यों पर ही 1 प्रतिशत सेस देना होगा। इस नियम से कम लागत में घर बनाने वालों को बड़ी राहत मिली है, जिससे Bihar में घर बनाना अब पहले से कहीं अधिक किफायती हो जाएगा।

बड़ी खबर! बिहार में 50 लाख तक घर बनाने वालों को सरकार ने दी बंपर छूट, अब नहीं लगेगा यह टैक्स
Bihar Construction Cess: बिहार में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने मकान, दुकान और अन्य इमारतों के निर्माण पर वसूले जाने वाले 1 प्रतिशत सेस के लिए निर्धारित खर्च सीमा में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। अब 50 लाख रुपये तक का घर या दुकान बनाने वालों से श्रमिक कल्याण सेस नहीं वसूला जाएगा, जिससे आम जनता को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। यह महत्वपूर्ण फैसला श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने लिया है।
पहले, 10 लाख रुपये से अधिक की निर्माण लागत पर 1 प्रतिशत Bihar Construction Cess अनिवार्य रूप से वसूला जाता था। इस सीमा को अब चार गुना बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि अब केवल 50 लाख रुपये से अधिक की लागत वाले निर्माण कार्यों पर ही 1 प्रतिशत सेस लागू होगा। इससे कम लागत में निर्माण करने वाले लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
श्रमिक कल्याण सेस का उद्देश्य और वसूली प्रक्रिया
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से सभी निजी और सरकारी निर्माण कार्यों पर कुल निर्माण लागत का एक फीसदी उपकर यानी सेस वसूला जाता है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के कल्याण पर खर्च करना है। नियमों के मुताबिक, निर्माण कार्य शुरू होने के 30 दिनों के भीतर प्रपत्र-एक में आवश्यक सूचनाएं भरकर उपकर निर्धारण पदाधिकारी के सामने सेस का भुगतान करना होता है।
सरकार ने इस सेस की वसूली की जिम्मेदारी नगर निकायों को सौंपी है। नगर निकाय नक्शा पारित करते समय ही सेस की वसूली शुरू कर देते हैं। सेस का भुगतान उप श्रमायुक्त सह उपकर निर्धारण पदाधिकारी के समक्ष करना अनिवार्य है। यदि निर्माण करने वाले सूचनाएं नहीं देते हैं, तो उपकर निर्धारण पदाधिकारी सूचना मिलने पर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं।
देरी पर जुर्माना और GIS मैपिंग की पहल
सेस की राशि समय पर जमा नहीं करने वालों को हर महीने 2 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। नियोक्ताओं से प्राप्त यह राशि बोर्ड में जमा की जाती है और फिर इसे मजदूरों के कल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जाता है। वर्तमान में, बोर्ड में 46 लाख से अधिक कामगार निबंधित हैं। विभाग अधिक से अधिक मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसी क्रम में, जीआईएस (Geographic Information System) के माध्यम से फिलहाल पटना, गया और मुजफ्फरपुर में उपकरण मूल्यांकन एवं संग्रहण का कार्य शुरू किया गया है। एक एजेंसी द्वारा दानापुर, खगौल, पटना, बोधगया और गया में जीआईएस मैपिंग की जा चुकी है, और जल्द ही यह व्यवस्था अन्य जिलों में भी लागू की जाएगी।
सेस वसूली का वित्तीय लेखा-जोखा
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (मई तक) में बिहार में अब तक 113 करोड़ रुपये के सेस की वसूली हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में सरकार को 755 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हुआ था। वर्ष 2024-25 में सर्वाधिक 768 करोड़ रुपये का सेस निर्माण कराने वालों से वसूला गया था। यह आंकड़ा सेस संग्रह के महत्व को दर्शाता है:
| वित्तीय वर्ष | वसूली हुई राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| 2019-20 | 289.75 |
| 2020-21 | 329.97 |
| 2021-22 | 372.97 |
| 2022-23 | 464.69 |
| 2023-24 | 694.80 |
| 2024-25 | 768.63 |
| 2025-26 | 755.56 |
| 2026-27 (मई तक) | 113.00 |
यह आंकड़ा दर्शाता है कि मजदूरों के कल्याण के लिए प्रति वर्ष करोड़ों रुपये का फंड इकट्ठा किया जाता है, जिसका उपयोग उनके जीवन स्तर को सुधारने में किया जाता है। निर्माण सेस की सीमा बढ़ने से छोटे और मध्यम वर्ग के लोगों को राहत मिलेगी, जबकि मजदूरों के कल्याण के लिए फंड संग्रह का कार्य भी जारी रहेगा।
क्यों मिली यह राहत? जानिए नए नियम और बिहार बिल्डिंग रूल्स
बिहार भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से सभी निजी और सरकारी निर्माण कार्यों पर कुल लागत का एक फीसदी उपकर वसूला जाता है। इस श्रमिक कल्याण सेस का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के कल्याण पर खर्च होने वाली राशि जुटाना है। नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने के 30 दिनों के भीतर प्रपत्र-एक में जानकारी भरकर उपकर निर्धारण पदाधिकारी के समक्ष सेस का भुगतान करना होता है।
श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने इस सीमा को बढ़ाकर आम जनता को राहत देने का निर्णय लिया है। अब नए Bihar बिल्डिंग रूल्स के तहत, नगर निकायों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे नक्शा पारित करते समय ही सेस की वसूली सुनिश्चित करें। सेस का भुगतान उप श्रमायुक्त सह उपकर निर्धारण पदाधिकारी के समक्ष करना होता है। यदि निर्माण करने वाले सूचनाएं नहीं देते हैं, तो उपकर निर्धारण पदाधिकारी आवश्यक कार्रवाई कर सकते हैं। समय पर सेस जमा न करने पर हर महीने 2 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ सकता है।
सेस वसूली की प्रक्रिया और GIS मैपिंग का कमाल
राज्य सरकार मजदूरों के कल्याण के लिए इस सेस की राशि का उपयोग करती है। बोर्ड में वर्तमान में 46 लाख से अधिक कामगार पंजीकृत हैं, जिन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। विभाग अधिक से अधिक मजदूरों को इन योजनाओं से जोड़ने के लिए नई रणनीतियों पर काम कर रहा है। इसी क्रम में, जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GIS) के माध्यम से उपकर मूल्यांकन और संग्रहण का कार्य शुरू किया गया है।
फिलहाल, पटना, गया और मुजफ्फरपुर जैसे प्रमुख जिलों में GIS मैपिंग का काम चल रहा है। एजेंसी ने दानापुर, खगौल, पटना, बोधगया और गया जैसे क्षेत्रों में GIS मैपिंग पूरी कर ली है। जल्द ही यह आधुनिक व्यवस्था राज्य के अन्य जिलों में भी लागू की जाएगी, जिससे सेस वसूली प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता आएगी।
करोड़ों में वसूली, श्रमिकों को लाभ: एक नजर में आंकड़े
श्रम संसाधन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में मई तक 113 करोड़ रुपये का सेस वसूला जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्षों में भी सेस की वसूली में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जो श्रमिकों के कल्याण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
| वित्तीय वर्ष | वसूली हुई राशि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|
| 2019-20 | 289.75 |
| 2020-21 | 329.97 |
| 2021-22 | 372.97 |
| 2022-23 | 464.69 |
| 2023-24 | 694.80 |
| 2024-25 | 768.63 |
| 2025-26 | 755.56 |
| 2026-27 (मई तक) | 113.00 |
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि निर्माण क्षेत्र से प्राप्त होने वाले उपकर की राशि लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा लाभ पंजीकृत श्रमिकों को मिलता है। इस राशि से श्रमिकों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जाती हैं।
सरकार का यह कदम न केवल आम जनता को निर्माण लागत में राहत देगा, बल्कि सेस वसूली प्रक्रिया को भी अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाएगा। आने वाले समय में GIS मैपिंग का विस्तार राज्य के अन्य हिस्सों में भी किया जाएगा, जिससे श्रमिकों के कल्याण के लिए अधिक संसाधन जुटाए जा सकेंगे।







