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Darbhanga News: दरभंगा कोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग के अपहरण और जानलेवा हमले समेत 8 आरोपियों की जमानत खारिज, जेल में कटेगी रातें

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Darbhanga News: दरभंगा सिविल कोर्ट में अपराधियों के लिए रियायत का दरवाजा मानो बंद हो गया है, जहाँ न्याय का हथौड़ा एक के बाद एक जघन्य मामलों के आरोपियों पर बरस रहा है। जिले की विभिन्न अदालतों ने नाबालिग के अपहरण, जानलेवा हमला और चोरी जैसे संगीन मामलों में शामिल आठ आरोपियों की जमानत अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

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Darbhanga News: इन प्रमुख मामलों में खारिज हुई जमानत

जानकारी के अनुसार, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार पाण्डेय की अदालत ने दो महत्वपूर्ण मामलों में अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज किया। पहला मामला सदर थाना कांड संख्या-303/25 से जुड़ा है, जिसमें एक नाबालिग लड़की के अपहरण की अप्राथमिकी आरोपी साजन खातून और मो. तनवीर कुमार उर्फ नवीर खलीफा की अर्जी खारिज हुई। वहीं, सिमरी थाना कांड संख्या-161/25 के आरोपी मो. शाहिद जावेद और हरि किशोर यादव को भी अदालत से कोई राहत नहीं मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसी अदालत ने सदर थाना कांड संख्या-336/25 में जेल में बंद आरोपी मो. अशगर का नियमित जमानत आवेदन भी नामंजूर कर दिया।

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इसके अतिरिक्त, अपर सत्र न्यायाधीश उपेंद्र कुमार की अदालत ने केवटी थाना कांड संख्या-214/25 में जानलेवा हमला करने के आरोपी राम प्रसाद यादव उर्फ ललन जी की जमानत अर्जी ठुकरा दी। वहीं, अपर सत्र न्यायाधीश नागेश प्रताप सिंह की कोर्ट ने सिमरी थाना कांड संख्या-287/25 में मोटरसाइकिल और मोबाइल चोरी के आरोपी मनीष कुमार और प्रिंस कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के इस कड़े रुख से अपराधियों के हौसले पस्त हुए हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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न्यायपालिका की सख्ती से अपराध पर लगेगी लगाम

इस संबंध में लोक अभियोजक (पीपी) अमरेंद्र नारायण झा ने बताया कि न्यायालय द्वारा जघन्य अपराध करने वाले आरोपियों की जमानत याचिका को तत्काल खारिज किया जाना एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि जब संगीन अपराधों के आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिलती, तो इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है और अपराध की घटनाओं में निश्चित रूप से कमी आती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। न्यायालय के इन फैसलों से पीड़ित पक्ष को भी न्याय प्रणाली पर भरोसा मजबूत होता है।

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