

Darbhanga Sugar Mill: कभी मिथिला की शान रही रैयाम चीनी मिल के बंद पहिए अब फिर से घूमने को बेताब हैं। जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में हुई एक अहम बैठक ने इस उम्मीद को नई पंख लगा दी है, जहाँ दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने सहकारिता मॉडल पर मिल को पुनर्जीवित करने का खाका पेश किया।
दरभंगा समाहरणालय में गुरुवार को जिलाधिकारी श्री कौशल कुमार की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु वर्षों से बंद पड़ी रैयाम/दरभंगा चीनी मिल को सहकारिता मॉडल के आधार पर पुनः पटरी पर लाना था। बैठक में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ, नई दिल्ली से आई एक विशेषज्ञ टीम ने हिस्सा लिया और मिल को फिर से चालू करने की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सहकारिता मॉडल से न केवल मिल दोबारा शुरू होगी, बल्कि इसका सीधा फायदा स्थानीय किसानों को भी मिलेगा। इस मॉडल के तहत, किसानों को मिल के उत्पादन, प्रबंधन और मुनाफे में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी दी जाएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारियों ने कहा कि इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
Darbhanga Sugar Mill को लेकर क्या है सहकारिता मॉडल?
सहकारिता मॉडल एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें स्थानीय किसान एकजुट होकर मिल का संचालन करेंगे। दिल्ली से आई टीम के विशेषज्ञों, जिनमें मुख्य गन्ना सलाहकार आर.बी. डुले और तकनीकी सलाहकार एम. चौधरी शामिल थे, ने इस मॉडल के फायदों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से किसानों का शोषण रुकता है और वे अपनी उपज का सही मूल्य प्राप्त कर पाते हैं। यह मॉडल स्थानीय संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करता है और सामूहिक विकास को बढ़ावा देता है।
बैठक के दौरान मिल को फिर से चालू करने में आने वाली चुनौतियों पर भी गहन चर्चा हुई। सबसे बड़ी चुनौती के रूप में गन्ना क्षेत्रफल (रकबा) में कमी और सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था को चिन्हित किया गया। अधिकारियों ने माना कि मिल को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ने की उपलब्धता आवश्यक है, जिसके लिए गन्ना उत्पादन को बढ़ावा देना होगा। इस संदर्भ में सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने, खराब पड़े नलकूपों को ठीक करने और पानी के वैकल्पिक स्रोतों का विकास करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि गन्ने की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
सिंचाई और गन्ना रकबा बनी सबसे बड़ी चुनौती
चीनी मिल के सफल संचालन के लिए एक विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए एक Cane Feasibility Report बनाने पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने कृषि, सहकारिता, सिंचाई, ऊर्जा, और राजस्व सहित सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराएं ताकि एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक योजना बनाई जा सके। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बैठक में अपर समाहर्ता राजस्व श्री मनोज कुमार, संयुक्त निबंधक (सहयोग समितियां) विजय कुमार सिंह, ईख पदाधिकारी पुष्कर राज, और जिला सहकारिता पदाधिकारी सुदर्शन कुमार समेत अन्य कई संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को दरभंगा के औद्योगिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

