

Bankers Meet: मधुबनी की धरती पर जब किसानों के पसीने और उद्यमियों के सपनों को पंख लगाने की बात आई, तो बैंकों की चौखट पर एक बड़ी चौपाल सजी। नाबार्ड की अगुवाई में हुई इस बैठक का लब्बोलुआब यही रहा कि अब फाइलों में योजनाओं को दौड़ाने की नहीं, बल्कि सीधे जरूरतमंदों तक पैसा पहुंचाने की बारी है।
Bankers Meet में KCC से लेकर उद्यमिता तक पर मंथन
मधुबनी में नाबार्ड के सौजन्य से आयोजित इस अहम बैठक की अध्यक्षता जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक द्वारा की गई। इसमें जिले के तमाम बड़े बैंकों के वरीय अधिकारी, नाबार्ड के प्रतिनिधि एवं बैंक प्रबंधक शामिल हुए। बैठक का मुख्य एजेंडा स्पष्ट था – किसानों, स्वयं सहायता समूहों, एफपीओ (FPO) और ग्रामीण उद्यमियों को बैंकिंग योजनाओं की मुख्यधारा से जोड़ना, ताकि उनकी आर्थिक प्रगति का रास्ता सुगम हो सके।
अधिकारियों ने साफ कहा कि किसानों को समय पर और सरल प्रक्रिया के माध्यम से ऋण मुहैया कराना बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिए। विशेष रूप से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि यंत्रीकरण एवं दीर्घकालिक कृषि ऋण जैसे क्षेत्रों में बैंकों से सहयोग बढ़ाने की अपील की गई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारियों का मानना है कि सही समय पर वित्तीय सहायता मिलने से किसानों की आय में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने की कवायद तेज
चर्चा का दायरा सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP), पीएम एफएमई (PMFME) और कृषि अवसंरचना फंड (AIF) जैसी योजनाओं के जरिए ग्रामीण युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करने में बैंकों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के कंप्यूटरीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी और एफपीओ को वित्तीय सहायता दी जाएगी, ताकि इसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंच सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। सभी बैंकों को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया कि वे सरकारी योजनाओं को पूरी गंभीरता से लागू करें और किसी भी पात्र लाभार्थी को ऋण देने में अनावश्यक देरी न करें।


