

PM Modi Israel Visit: कूटनीति की बिसात पर एक चाल, और उसके बाद उठे भूचाल ने भारत की दशकों पुरानी तटस्थता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेल अवीव द्वारा तेहरान पर हमले से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़रायल यात्रा ने एक गहरे कूटनीतिक संदेश को जन्म दिया है, जिस पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस यात्रा से ‘बहुत गलत संदेश’ गया है और भारत को इस संघर्ष में हमेशा तटस्थ रहने की अपनी विरासत को याद रखना चाहिए। ओवैसी ने दावा किया कि इज़रायल ने प्रधानमंत्री की इस यात्रा का इस्तेमाल यह संदेश देने के लिए किया है कि भारत उनके साथ खड़ा है, जबकि हकीकत यह है कि भारत की विदेश नीति में हमेशा से शांति और तटस्थता का सिद्धांत रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
PM Modi Israel Visit: समय को लेकर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने खाड़ी देशों में रहने वाले लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा समाप्त होते ही इज़रायल द्वारा ईरान पर हमला करने से उन देशों के आम नागरिकों को क्या संदेश जाएगा? उन्होंने बहरीन और कतर पर हुए हमलों का हवाला देते हुए सऊदी अरब पर भी संभावित हमले की आशंका जताई, जिससे खाड़ी देशों में तनाव बढ़ने की चिंता और गहरा गई है। भारत की 80 साल पुरानी तटस्थता की विरासत को इस घटनाक्रम से गहरा आघात लगा है।
ओवैसी ने तीखे लहजे में कहा कि ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार को देना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि “इज़रायल ने प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का इस्तेमाल हमला करने और दुनिया को यह बताने के लिए किया कि भारत उनके साथ है। यह विश्वासघात है।” उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को इस हमले की पूर्व सूचना थी, और यदि नहीं, तो इज़रायल ने भारत को “धोखा” दिया और प्रधानमंत्री की यात्रा का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
इजरायल के इस कदम से भारत को क्या मिला?
ओवैसी ने एक और गंभीर सवाल उठाया: “यदि प्रधानमंत्री का विमान हवा में होता और ऐसा हमला हुआ होता, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होता?” उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री देश को बताएं कि क्या इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें सूचित किया था कि इज़रायल ईरान पर हमला करने वाला है। यदि ऐसा था, तो प्रधानमंत्री को तुरंत अपनी यात्रा समाप्त कर देश लौट जाना चाहिए था। ओवैसी के अनुसार, यदि इज़रायल ने भारत को यह सूचित नहीं किया कि वह अमेरिका के सहयोग से ईरान पर हमला कर रहा है, तो “इज़रायल ने हमें धोखा दिया है।” उनका मानना है कि इज़रायल ने प्रधानमंत्री की यात्रा का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने और गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार को छिपाने के लिए किया है। इससे यह संदेश जाएगा कि भारत इज़रायल के साथ है, ईरान के साथ नहीं। उन्होंने अंत में पूछा कि इस हमले से भारत को क्या लाभ हो रहा है? आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


