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Bihar Holi News: सहरसा के बनगांव की ‘घुमौर होली’ – जहां कंधों पर चढ़कर मनाते हैं रंगों का अद्भुत त्योहार! पढ़िए कोई आधुनिक चलन नहीं…इतिहास में गहरी धंसी…विरासत और आपसी सौहार्द!

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रंगों का त्योहार होली, जब देश के हर कोने में खुशियों की बहार लेकर आता है, तब कुछ जगहें ऐसी होती हैं जहां यह उत्सव सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत और आपसी सौहार्द का जीवंत प्रमाण बन जाता है। बिहार होली: सहरसा का बनगांव ऐसा ही एक अनूठा गाँव है, जहाँ की ‘घुमौर होली’ बरसाना की लठमार होली से कम मोहक नहीं, बस तरीका जुदा है।

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बिहार होली: बनगांव की अनूठी घुमौर परंपरा

उत्तर प्रदेश के बरसाना की लठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, जहाँ महिलाएं लाठियों से पुरुषों का स्वागत करती हैं और पुरुष ढाल लेकर बचते हैं। लेकिन बिहार के सहरसा जिले के बनगांव में होली मनाने का एक अपना ही निराला अंदाज है। यहाँ लठ नहीं, बल्कि लोग एक-दूसरे के कंधों पर चढ़कर होली खेलते हैं, जो सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और सौहार्द का गहरा संदेश देता है। यह अद्भुत दृश्य देखकर लगता है जैसे पूरा गांव प्रेम के रंगों में सराबोर हो गया हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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बनगांव की यह ‘घुमौर होली’ कोई आधुनिक चलन नहीं है। इसकी जड़ें इतिहास में गहरी धंसी हुई हैं और यह परंपरा लगभग 1810 से चली आ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, यह अनूठी पारंपरिक होली उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी और तब से इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है। यह उत्सव गांव की एकता और भाईचारे का प्रतीक बन गया है।

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सदियों पुरानी परंपरा और सामाजिक सौहार्द

इस अनूठे होली समारोह में गाँव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी उत्साह के साथ भाग लेते हैं। लोग एक-दूसरे को कंधों पर उठाकर घूमते हैं और रंग-गुलाल लगाते हैं। यह न केवल एक मनोरंजक क्रिया है, बल्कि यह आपसी रिश्तों को मजबूत करने का एक जरिया भी है। गाँव में कोई भेदभाव नहीं होता; सभी धर्म और जाति के लोग मिलकर इस त्योहार को मनाते हैं, जो बनगांव को truly खास बनाता है।

बनगांव की ‘घुमौर होली’ सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक सामाजिक सेतु है जो लोगों को एक-दूसरे के करीब लाता है। इस दौरान गीतों और नृत्यों का भी आयोजन होता है, जिससे पूरे गांव में उत्सव का माहौल बना रहता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह विशिष्टता ही इस गाँव को बिहार के सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

आकर्षण का केंद्र बनी ‘घुमौर होली’

यह अनोखी ‘घुमौर होली’ अब सिर्फ स्थानीय लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दूर-दूर से लोग इस अद्भुत नजारे को देखने आते हैं। यह गाँव बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक जीता-जागता उदाहरण प्रस्तुत करता है, जहाँ प्राचीन परंपराएं आज भी जीवंत हैं और नई पीढ़ियों द्वारा उत्साह के साथ अपनाई जा रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गाँव का हर घर इस दिन खुशियों से गुलजार रहता है, और हर चेहरा रंगों से सराबोर होकर एक नई ऊर्जा का संचार करता है।

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