
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि, आदिशक्ति मां दुर्गा की उपासना का महापर्व है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होकर नवमी तिथि तक चलता है। यह समय भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिसमें अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व है। यदि आपके मन में भी चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी की सही तिथि और शुभ मुहूर्त को लेकर जिज्ञासा है, तो आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह लेख आपको इन महत्वपूर्ण तिथियों और पूजा विधियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।
Chaitra Navratri 2026 में कब हैं अष्टमी और नवमी?
Chaitra Navratri 2026: अष्टमी और नवमी का महत्व
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाष्टमी के नाम से जाना जाता है और इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। कन्या पूजन और हवन के लिए यह दिन अत्यंत शुभ होता है। वहीं, नवमी तिथि को महानवमी कहते हैं, जिस दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। इसी दिन भगवान श्री राम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, जिसे राम नवमी के नाम से जानते हैं। इन दोनों ही दिनों पर विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान कर भक्त अपनी सभी बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं। धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
चैत्र नवरात्रि अष्टमी पूजा विधि
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी के दिन मां महागौरी की पूजा भक्ति भाव से करें। इस दिन की पूजा विधि कुछ इस प्रकार है:
* स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
* मां दुर्गा के सामने दीपक प्रज्वलित करें और संकल्प लें।
* मां महागौरी को सफेद फूल, नारियल, चुनरी और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
* अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नौ कन्याओं को भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें।
* हवन करें और मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।
चैत्र नवरात्रि नवमी पूजा विधि
नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ राम नवमी का उत्सव भी मनाया जाता है। इस दिन की पूजा विधि इस प्रकार है:
* सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
* मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा स्थापित करें और उन्हें कमल का फूल, फल, नैवेद्य अर्पित करें।
* इस दिन हवन करना विशेष फलदायी होता है। हवन में तिल, जौ, गुग्गल आदि सामग्री का उपयोग करें।
* भगवान श्री राम की पूजा करें और रामायण का पाठ करें।
* ब्राह्मणों और गरीबों को दान दें। यह पूजा विधि आपको अवश्य ही लाभ पहुंचाएगी।
### शुभ मुहूर्त तालिका
चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी की तिथि व शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
| तिथि | दिन | विवरण | प्रारंभ | समाप्त |
| :—————— | :———- | :—————— | :—————– | :—————– |
| चैत्र शुक्ल अष्टमी | शुक्रवार | 27 मार्च 2026 | 26 मार्च रात्रि 09:00 बजे | 27 मार्च रात्रि 11:30 बजे |
| संधि पूजा मुहूर्त | शुक्रवार | 27 मार्च 2026 | रात्रि 11:06 बजे | रात्रि 11:54 बजे |
| चैत्र शुक्ल नवमी | शनिवार | 28 मार्च 2026 | 27 मार्च रात्रि 11:30 बजे | 29 मार्च प्रातः 01:45 बजे |
| राम नवमी पूजा मुहूर्त | शनिवार | 28 मार्च 2026 | पूर्वाह्न 11:00 बजे | अपराह्न 01:30 बजे |
चैत्र नवरात्रि का पौराणिक महत्व
चैत्र नवरात्रि का संबंध पौराणिक काल से है, जब भगवान श्री राम ने रावण का वध करने से पूर्व मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी प्रकार, मार्कण्डेय पुराण में वर्णित देवी महात्म्य के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर जैसे क्रूर राक्षसों का संहार कर धर्म की स्थापना की थी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और नई शुरुआत का प्रतीक है। मां दुर्गा की उपासना से भक्त आत्मिक शांति और शक्ति प्राप्त करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नवरात्रि के शक्तिशाली मंत्र
नवरात्रि के दौरान इन शक्तिशाली मंत्रों का जाप करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
उपसंहार और उपाय
चैत्र नवरात्रि 2026 में अष्टमी और नवमी की इन पावन तिथियों पर श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा की उपासना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और सभी कष्ट दूर होते हैं। इन दिनों पर विशेष रूप से दान-पुण्य करने, कन्या पूजन और हवन करने का विधान है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मां दुर्गा की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।




