Chaitra Navratri: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा के नवदुर्गा स्वरूपों की आराधना का महापर्व है, जिसके तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। देवी चंद्रघंटा भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश कर भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का संचार करती हैं। इनकी उपासना से साधक को अलौकिक शक्ति और साहस की प्राप्ति होती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
चैत्र नवरात्रि 2026: माता चंद्रघंटा की उपासना से मिलता है भय से छुटकारा और शांति का वरदान
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व और विधि
चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है, और इनमें से तीसरा स्वरूप देवी चंद्रघंटा का है। ऐसी मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्तों के सभी पाप, कष्ट और भय दूर हो जाते हैं। इनकी पूजा से जीवन में पराक्रम और निर्भयता आती है। माता चंद्रघंटा अपने भक्तों को अलौकिक शक्तियों का अनुभव कराती हैं और उन्हें हर प्रकार की बाधाओं से मुक्ति दिलाती हैं। मां का यह स्वरूप शांति और वीरता का प्रतीक है। मां चंद्रघंटा अपने मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र धारण करती हैं, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके दस हाथ हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। माता सिंह पर सवार होकर दुष्टों का संहार करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजन विधि:
- सुबह स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें।
- माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
- गंगाजल से शुद्धिकरण के बाद, माता को रोली, अक्षत, धूप, दीप, गंध और पुष्प (विशेषकर कमल का फूल) अर्पित करें।
- माता को दूध से बनी मिठाइयों, खीर या हलवे का भोग लगाएं।
- पूजा के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करें या मां के मंत्रों का जाप करें।
- अंत में माता चंद्रघंटा की आरती करें और उनसे सुख-समृद्धि व शांति की प्रार्थना करें।
शुभ रंग और प्रिय भोग:
- शुभ रंग: माता चंद्रघंटा को स्वर्णिम (गोल्डन) रंग अत्यंत प्रिय है। इस दिन पीले या सुनहरे रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है।
- प्रिय भोग: मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां, खीर और शहद का भोग लगाना चाहिए। यह आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शुभ मुहूर्त
| पूजा का दिन | तिथि | पूजन का समय |
|---|---|---|
| चैत्र नवरात्रि तृतीय | चैत्र शुक्ल तृतीया | पूरे दिन |
मां चंद्रघंटा का मंत्र:
पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
पूजन से लाभ और उपाय:
मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करने से भक्त को अलौकिक शांति की अनुभूति होती है, उसका मन शांत और स्थिर रहता है। भय और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से मां चंद्रघंटा की उपासना करते हैं, उन्हें भूत-प्रेत और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आप मां चंद्रघंटा को एक घंटा अर्पित कर सकते हैं, ऐसा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पावन अवसर पर, धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें।
यह लेख आपको मां चंद्रघंटा के स्वरूप, पूजा विधि और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के महत्व को समझने में सहायक होगा। चैत्र नवरात्रि का यह तीसरा दिन आपके जीवन में शांति और साहस का संचार करे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







