
Maa Chandraghanta Aarti: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर, आदि शक्ति मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की उपासना का विशेष विधान है। इनकी आराधना से साधकों को अलौकिक शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
मां चंद्रघंटा आरती: नवरात्रि के तृतीय दिवस पर पाएं असीम कृपा
Maa Chandraghanta Aarti और उपासना का महत्व
चैत्र नवरात्रि के तृतीय दिवस पर, भक्तगण मां दुर्गा के अद्भुत और सौम्य स्वरूप मां चंद्रघंटा की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी साधक सच्चे मन और पूर्ण विधि-विधान से माता चंद्रघंटा की पूजा और आरती करता है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। माता की कृपा से भक्तों के भीतर अपार शौर्य और आत्मविश्वास का संचार होता है। वे भयमुक्त होकर जीवन के पथ पर आगे बढ़ते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मां चंद्रघंटा की उपासना से समस्त नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है और घर-परिवार में सुख-शांति का वास होता है।
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पूजा विधि
- सर्वप्रथम ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर माता चंद्रघंटा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- माता को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- उन्हें श्वेत कमल और पीले गुलाब के पुष्प अत्यंत प्रिय हैं, इन्हें अवश्य चढ़ाएं।
- इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और फिर मां चंद्रघंटा की आरती गाएं।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत ही तेजोमयी और शांत है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिस कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके दस हाथ हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। इनका वाहन सिंह है और यह सदैव युद्ध के लिए तत्पर रहती हैं। माता चंद्रघंटा अपने भक्तों को निर्भय बनाती हैं और उन्हें सभी बाधाओं से मुक्ति दिलाती हैं। इनकी कृपा से व्यक्ति अपने अंदर की बुराइयों पर विजय प्राप्त कर सकता है और सकारात्मकता की ओर अग्रसर होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र
पिंडज प्रवरारुढ़ा चंडकोपास्त्र कैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चंद्रघंटेति विश्रुता।।
मां चंद्रघंटा की आरती
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम।
पूर्ण कीजो मेरे सब काम॥
चंद्र समान तुम शीतल दाती।
शुभ्र ज्योत्स्ना तुम जग मग भाती॥
भय हरनी मंगल करणी।
नित्य प्रति तुम कष्ट हरणी॥
पाप-ताप नाशिनी कल्याणी।
बिगड़े काम बनाती रानी॥
मैं हूं दीन तू है दुख हरनी।
मेरे सारे कष्ट निवारनी॥
करो प्रणाम सब भक्त तेरे।
आओ शरण तेरी सब मेरे॥
तुम्हारे दर पर जो भी आता।
असीम शांति वह पाता॥
जो भी श्रद्धा से तुम्हें ध्याता।
मनवांछित फल वह पाता॥
निष्कर्ष और उपाय
मां चंद्रघंटा की सच्चे मन से की गई उपासना साधक के जीवन में अदम्य साहस और आध्यात्मिक उन्नति लाती है। इनकी कृपा से व्यक्ति हर प्रकार के भय, रोग और कष्ट से मुक्त हो जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिवस पर मां चंद्रघंटा का स्मरण कर, अपने भीतर के शौर्य को जागृत करें और शांतिपूर्ण जीवन की कामना करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस दिन मां को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।


