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Darbhanga News: गेहूं की फसल को नुकसान, बेमौसम मार से बर्बाद हुई उपज, MSP पर खरीद न होने से किसान बेहाल

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गेहूं की फसल को नुकसान: इस बार गेहूं किसानों की किस्मत ठीक नहीं रही। फरवरी में पछुआ हवा ने दानों को सुखाया तो मार्च में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रही-सही कसर पूरी कर दी। नतीजतन, उपज तो कम हुई ही, गुणवत्ता भी बिगड़ गई, जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद भी नहीं हो पा रही है।

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क्यों हुआ गेहूं की फसल को नुकसान?

जाले प्रखंड क्षेत्र में मौसम की बेरुखी और लगातार बूंदाबांदी ने रबी की प्रमुख फसल गेहूं की पैदावार पर गहरा असर डाला है। फरवरी महीने में चली पछुआ हवा ने गेहूं के दानों को भरने से पहले ही सुखा दिया, जिससे उनका समुचित विकास नहीं हो पाया। इसके बाद मार्च में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी फसल को खेतों में गिरा दिया। पकने के बाद हुई इस बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की गुणवत्ता और उसकी चमक को भी बुरी तरह बिगाड़ दिया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, कई किसान बुधवार को बूंदाबांदी के बीच अपनी गेहूं की थ्रेसिंग करते नजर आए, जो उनकी मजबूरी को दर्शाता है।

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जोगियारा के प्रगतिशील किसान भोला प्रसाद सिंह, जाले के प्रेम कुमार धीर, रतनपुर के गोपी कृष्ण ठाकुर, राज सिंघानिया और विजय दास जैसे स्थानीय किसानों ने बताया कि इस बार गेहूं की उपज मानक के अनुरूप नहीं हुई है। गुणवत्ता में कमी के कारण एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के जोगियारा स्थित साइलो सेंटर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दर पर गेहूं की खरीद नहीं हो रही है। आधे से अधिक पंचायतों में पैक्स (प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ) भी निष्क्रिय हैं, जिससे वहाँ भी खरीद प्रक्रिया ठप पड़ी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। ऐसे में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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MSP पर खरीद न होने से बढ़ी किसानों की परेशानी

सरकारी खरीद व्यवस्था में खामियों के चलते किसान मजबूरन स्थानीय बाजार और व्यापारियों को अपना गेहूं लगभग 22.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचने को विवश हैं। यह दर न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम है, जिससे उन्हें अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। किसानों का कहना है कि एक तरफ प्राकृतिक आपदा ने गेहूं की फसल को नुकसान पहुँचाया, वहीं दूसरी तरफ सरकारी खरीद तंत्र की विफलता ने उनकी कमर तोड़ दी है।

इस संकटपूर्ण स्थिति ने सरकारी खरीद व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब किसानों को सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत होती है, तब उन्हें निजी व्यापारियों के आगे झुकना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और दयनीय हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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