
Vishva Parv: भागलपुर के सबौर में एक ऐसा पर्व, जहां आस्था और लोककथाएं दूध की पवित्र धाराओं के साथ जीवंत हो उठती हैं। इस साल भी भगवान विशु को समर्पित इस खास पर्व पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसने इस प्राचीन परंपरा को फिर से खास बना दिया।
भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड स्थित भिट्ठी गांव में विशूवापर्व के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। इस पावन मौके पर ग्रामीणों ने भगवान विशु को दूध अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां हर उम्र के लोग भक्ति में लीन नजर आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पूजा का विशेष महत्व है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि सच्चे मन से यहां कुछ भी मांगा जाए, तो भगवान विशु उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। इसी अटूट आस्था के कारण हर साल विशूवापर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
Vishva Parv का महत्व और लोकमान्यताएं
ग्रामीणों ने इस अवसर पर विशू बाबा से जुड़ी कई लोक मान्यताओं को भी साझा किया। उनका कहना है कि विशू बाबा का जन्म सबौर के भिट्ठी गांव में ही हुआ था, जबकि उनका पालन-पोषण मधेपुरा के पचरासी में हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। भिट्ठी गांव की यह विशेष पहचान इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। मान्यता के अनुसार, उनकी मृत्यु के बाद एक चमत्कारिक घटना घटी, जब गाय-बकरियों के दूध की धारा बह निकली और वह गंगा में समाहित हो गई। बताया जाता है कि यह धारा बाबूपुर मोड़ तक पहुंची, जिसके बाद लोगों को इस दिव्य घटना का एहसास हुआ।
विशू बाबा की अद्भुत कथा और चमत्कार
यह कहानी न केवल एक स्थानीय देवता की गाथा है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का भी हिस्सा है। विशू बाबा की यह चमत्कारिक कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई जाती रही है, जो लोगों की आस्था को और भी दृढ़ बनाती है। हर वर्ष, इस पर्व पर भक्त दूर-दूर से आते हैं, इस विश्वास के साथ कि विशू बाबा उनकी प्रार्थनाएँ सुनेंगे और पूरी करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
भक्तिमय माहौल और सांस्कृतिक विरासत
Vishva Parv के मौके पर श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन, ध्यान और वंदना के साथ भगवान विशु और विशू बाबा की आराधना की। पूरे गांव में भक्तिमय माहौल बना रहा, जिससे हर तरफ सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखा। यह पर्व समाज को एकजुट करने और प्राचीन मान्यताओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक सशक्त माध्यम है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






