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Patna Ganga Encroachment: गंगा किनारे चला बुलडोजर, 35 पक्के अवैध ढांचे ध्वस्त, वसूला जुर्माना

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Patna Ganga Encroachment: पटना में गंगा किनारे अवैध कब्जों पर प्रशासन का चाबुक जारी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर लगातार दूसरे दिन भी विशेष अभियान चलाया गया, जिसने नदी किनारे की बेशकीमती जमीन को अवैध निर्माण से मुक्त कराने का लक्ष्य रखा।

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सुबह से ही टीमें मौके पर मुस्तैद थीं और अलग-अलग हिस्सों में कार्रवाई की गई। पटना सिटी अनुमंडल के अजीमाबाद नगर अंचल में भद्र घाट से कंगन घाट तक यह अभियान चला। यहां से कुल 17 संरचनाएं हटाई गईं, जिनमें 9 झोपड़ियां और 8 छोटे स्टॉल शामिल थे। मौके से 2 टीपर बालू भी जब्त किया गया और अतिक्रमण करने वालों से 10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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गंगा किनारे अतिक्रमण पर बड़ी कार्रवाई

उधर, पटना सदर अनुमंडल के पाटलिपुत्र अंचल में भी प्रशासन का बुलडोजर गरजा। पटना-दीघा मुख्य सड़क के किनारे सुरक्षा बांध के गेट नंबर 79 से 83 तक विशेष अभियान चलाया गया, जहां 35 पक्के अवैध निर्माण तोड़ दिए गए। मशीनें लगातार काम करती रहीं और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

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पटना गंगा अतिक्रमण: स्थायी और अस्थायी ढांचों पर चला बुलडोजर

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह क्षेत्र जनहित से जुड़ा है और यहां कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं चल रही हैं। काम में किसी भी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गंगा किनारे कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सिर्फ पुराने अतिक्रमण ही नहीं हटाए जाएं, बल्कि नए कब्जों को भी रोका जाए। Patna Ganga Encroachment को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। किसी ने भी बाधा डालने की कोशिश की तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

क्यों जरूरी है यह अभियान?

जिलाधिकारी ने बताया कि गंगा के किनारे की असर्वेक्षित जमीन पर लंबे समय से कब्जे किए जा रहे थे और कई जगह अवैध निर्माण खड़े कर दिए गए थे। कुछ मामलों में असामाजिक तत्व भी अपने फायदे के लिए सरकारी जमीन घेरने की कोशिश कर रहे थे, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नदी क्षेत्र की असर्वेक्षित जमीन सरकारी होती है और इस पर किसी भी व्यक्ति का दावा मान्य नहीं है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आदेशों के तहत फ्लड प्लेन क्षेत्र में निर्माण पर पूरी तरह रोक है। निजी जमीन पर भी बिना अनुमति कोई ढांचा नहीं बन सकता।

यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अलग-अलग इलाकों में टीमें भेजी जा रही हैं। इसका मुख्य मकसद नदी किनारे की जमीन को पूरी तरह साफ रखना और विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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