
शैल चित्र: बिहार के जमुई जिले में एक ऐसी खोज हुई है जिसने सबको चौंका दिया है। गिद्धेश्वर पहाड़ियों में मिले ये हज़ारों साल पुराने चित्र हमारी प्राचीन संस्कृति का आईना हैं। राज्य सरकार अब इनके संरक्षण में जुट गई है।
जमुई जिले में स्थित गिद्धेश्वर पहाड़ियों में हजारों साल पुराने शैल चित्र मिलने के बाद राज्य सरकार इनके संरक्षण की दिशा में सक्रिय हो गई है। गिद्धेश्वर पहाड़ियों के शैलाश्रयों (रॉक शेल्टर) में ये अनमोल कलाकृतियां करीब 2022 के आसपास खोजी गई थीं। वन विभाग के सर्वेक्षण में ये चित्र मिले, जो प्रागैतिहासिक काल से लेकर प्रारंभिक इतिहास काल तक के हैं। इन शैल चित्रों में मानव जीवन, वन्य जीवों, और विभिन्न आकृतियों का चित्रण है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध प्राचीन संस्कृति को दर्शाते हैं। पहाड़ियों में मिली प्रमुख धरोहर में शैल चित्र (Rock Paintings) मिले है। ये चित्र नव पाषाण, ताम्र पाषाण और प्रारंभिक ऐतिहासिक काल (10,000-2,000 ईसा पूर्व) के माने जा रहे हैं।
इन प्राचीन शैल चित्रों का महत्व
ये शैल चित्र नवपाषाण काल से लेकर प्रारंभिक इतिहास काल तक के माने जा रहे हैं, जो क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं। जमुई वन विभाग की टीम ने इस ऐतिहासिक खोज का गहन सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग का कार्य किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इन अद्वितीय कलाकृतियों का मिलना बिहार के पुरातात्विक मानचित्र में एक नया अध्याय जोड़ता है।
संरक्षण और अनुसंधान की सरकारी पहल
राज्य सरकार ने इन महत्वपूर्ण धरोहरों के संरक्षण और अध्ययन के लिए कमर कस ली है। वन प्रमंडल पदाधिकारी तेजस जायसवाल ने जानकारी दी है कि जल्द ही इन चित्रों के वैज्ञानिक संरक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही, इनका उपयोग गहन शोध और अध्ययन के लिए भी किया जाएगा, ताकि हमारी पीढ़ियां अपनी गौरवशाली अतीत से जुड़ सकें। यह पहल न केवल इन अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखेगी, बल्कि जमुई को पर्यटन और शोध के नक्शे पर एक महत्वपूर्ण स्थान भी दिलाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







