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Vat Savitri Vrat: माथे पर सिंदूर की लाल लकीर, हाथों में पूजा की डलिया, सोलह श्रृंगार किए सुहागिनें…पति की खातिर…कच्चे सूत

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Vat Savitri Vrat: आज ज्येष्ठ अमावस्या का पावन दिन है, और इस मौके पर सुहागिनों ने अपने पतियों की दीर्घायु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री व्रत रखा है। पटना से लेकर बिहार के विभिन्न जिलों तक वट वृक्षों के नीचे महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जो पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना कर रही हैं। माथे पर सिंदूर, हाथों में पूजा की डलिया और सोलह श्रृंगार किए ये महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हुई अपनी आस्था प्रकट कर रही हैं।

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Vat Savitri Vrat: आज ज्येष्ठ अमावस्या के शुभ अवसर पर देशभर में सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के साथ वट सावित्री व्रत रख रही हैं। सुबह से ही मंदिरों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर बरगद के वृक्षों के पास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। हाथों में पूजा की थाली और सोलह श्रृंगार कर ये महिलाएं भक्तिभाव में लीन हैं।

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माथे पर सिंदूर की लाल लकीर, हाथों में पूजा की डलिया, सोलह श्रृंगार किए सुहागिनें पारंपरिक गीत गाती हुई वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर रही हैं। पटना, दरभंगा, भागलपुर, मधुबनी, रोहतास, सारण, गया, बेगूसराय समेत बिहार के विभिन्न जिलों में ऐसी ही तस्वीरें देखने को मिल रही हैं, जहाँ महिलाएं श्रद्धापूर्वक इस पर्व को मना रही हैं।

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बाजारों में दिखा उत्साह, उमड़ी भीड़

व्रत से एक दिन पहले, 15 मई को पटना जिले के बख्तियारपुर सहित विभिन्न बाजारों में खरीदारी के लिए महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। पंखा, चूड़ी, लहठी, श्रृंगार सामग्री, नारियल, फल, मिठाई, ठेकुआ, गुलगुला और पूजन सामग्री की दुकानों पर लंबी कतारें लगी थीं। दुकानदारों ने बताया कि इस बार महिलाओं में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उत्साह देखने को मिला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। दुकानदार भी इस पर्व को लेकर काफी उत्साहित दिखे।

वट सावित्री व्रत: पूजा विधि और महत्व

  • महिलाएं सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक निर्जला व्रत रखती हैं।
  • बरगद के वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है।
  • जल, फूल, कुमकुम, चावल, फल चढ़ाए जाते हैं।
  • महिलाएं वट वृक्ष की 7, 21 या 108 बार परिक्रमा कर कच्चे सूत (रक्षा सूत्र) बांधती हैं।
  • पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण किया जाता है, जिसमें देवी सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस दिलाए थे।
  • इसके अतिरिक्त, कपड़ों से वर-वधू बनाना, मिट्टी के नाग-नागिन की पूजा करना, बरगद के पत्तों से श्रृंगार करना और तार या बांस के पंखे (बयान) बनाना भी इस पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूजा के बाद पति को पंखा झलकर तिलक लगाया जाता है।
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यह व्रत भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अटूट हिस्सा है, जहाँ पत्नियाँ अपने पति की दीर्घायु और खुशहाली के लिए कठोर तप करती हैं। Vat Savitri Vrat सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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क्यों खास है Vat Savitri Vrat का यह पर्व?

यह पर्व सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जहां सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। इसी मान्यता के चलते, हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अटूट वैवाहिक बंधन की कामना से यह व्रत रखती हैं। सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक महिलाएं निर्जला रहकर भगवान की उपासना करती हैं।

कल, पटना जिले के बख्तियारपुर समेत विभिन्न बाजारों में खरीदारी के लिए सुहागिन महिलाएं उमड़ पड़ी थीं। पंखा, चूड़ी, लहठी, श्रृंगार सामग्री, नारियल, फल, मिठाई, ठेकुआ, गुलगुला और पूजन सामग्री की दुकानों पर लंबी कतारें देखी गईं। दुकानदारों ने बताया कि इस बार महिलाओं में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक उत्साह है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। आज सुबह से पटना के पार्कों, मंदिर परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थित वट वृक्षों के पास भारी संख्या में महिलाएं जुट रही हैं। रोहतास, सारण, गया, बेगूसराय और अन्य जिलों से भी ऐसी ही भावपूर्ण तस्वीरें सामने आ रही हैं।

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पूजन विधि और परंपराएं

वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। इस दिन महिलाएं विशेष विधि-विधान से पूजा करती हैं:

  • वट वृक्ष को जल, फूल, कुमकुम, चावल और फल चढ़ाए जाते हैं।
  • महिलाएं वट वृक्ष की 7, 21 या 108 बार परिक्रमा कर कच्चे सूत (रक्षा सूत्र) बांधती हैं।
  • पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण किया जाता है, जो पतिव्रता सावित्री की अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
  • कुछ स्थानों पर कपड़ों से वर-वधू बनाने, मिट्टी के नाग-नागिन की पूजा करने और बरगद के पत्तों से श्रृंगार करने की भी परंपरा है।
  • पूजा के उपरांत, महिलाएं पति को पंखा झलकर तिलक करती हैं, जिसे ‘बयान’ कहा जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

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