spot_img

संकट में Darbhanga का ‘ आंगनबाड़ी ’, मानदेय अटका, बच्चों का पोषाहार भी बंद, अब आगे क्या होगा? जानिए

spot_img
- Advertisement -

दरभंगा: बिहार में बच्चों के निवाले पर फिर आफत आ गई है। भुखमरी और कुपोषण दूर भगाने वाली आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएँ खुद 5 महीने से मानदेय के इंतज़ार में हैं, जिससे उनकी थाली भी खाली रहने लगी है। यह सब बिहार सरकार की आर्थिक विफलता का सीधा परिणाम है, जिसका असर अति महत्वाकांक्षी बाल विकास परियोजना पर स्पष्ट दिख रहा है।

- Advertisement -

शहर के बेनीपुर से मिली जानकारी के अनुसार, एक तरफ नौनिहालों के मुंह से निवाले छीन लिए गए हैं, तो दूसरी तरफ भुखमरी और कुपोषण से लड़ने की जिम्मेदारी संभालने वाली आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका का मानदेय पिछले पांच महीने से रुका पड़ा है। इससे उनके परिवारों के सामने भी भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

- Advertisement -

आंगनबाड़ी योजना: पोषाहार बंद, कैसे दूर होगा कुपोषण?

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, बेनीपुर बाल विकास परियोजना के तहत कुल 290 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर प्रतिदिन लगभग 30 बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा के साथ-साथ पका पकाया भोजन (पोषाहार) देने का प्रावधान है। इसके अलावा, गर्भवती और धात्री महिलाओं के साथ-साथ पोषक क्षेत्र के नवजात शिशुओं के लिए भी ‘टेक होम राशन’ का वितरण सुनिश्चित किया गया है। हर महीने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को पोषाहार मद में 4,000 से 20,000 रुपये तक आवंटित किए जाते हैं, जिन्हें लाभार्थियों में वितरित करना अनिवार्य है। हालांकि, मौजूदा महीने में पोषाहार का आवंटन नहीं मिलने से बच्चों के साथ-साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं का पोषाहार भी बंद हो गया है।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Darbhanga News: दरभंगा में पत्नी को Porn Video Viral भेजा, सिंहवाड़ा के ग्रामीणों ने पीटकर किया पुलिस के हवाले, जानिए पूरा मामला

आंगनबाड़ी सेविकाएं: खुद कुपोषित होने को मजबूर!

जो सेविकाएं और सहायिकाएं बच्चों के स्वास्थ्य और शारीरिक वृद्धि का ख्याल रखती हैं, उन्हें खुद पिछले 5 महीनों से मानदेय नहीं मिला है। उन्हें न्यूनतम मजदूरी से भी कम मासिक मानदेय मिलता है, लेकिन वह भी समय पर नहीं। दुर्गा पूजा, होली, ईद और बकरीद जैसे त्योहारों पर भी उन्हें पैसे नहीं मिल पाते, जिससे उनके बच्चे अपनी माँ से सवाल करते रहते हैं। कुछ सेविकाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुपोषण दूर भगाने के बदले, वे खुद कुपोषित होने को मजबूर हैं। बिहार की इस आंगनबाड़ी योजना का भविष्य अब सवालों के घेरे में है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।

क्या कहते हैं अधिकारी?

इस संबंध में पूछने पर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) रंजीत कुमार ने बताया कि पोषाहार की राशि कोषागार द्वारा कुछ तकनीकी कारणों से जारी नहीं हो पाई है। मानदेय के संबंध में उन्होंने कहा कि स्थानीय कार्यालय की इसमें कोई भूमिका नहीं है। मासिक उपस्थिति विवरणी निदेशालय को भेजी जाती है, और वहीं से भुगतान होता है।

देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Bihar News: पटना में बुलडोजर, बड़ा एक्शन, Kia-Nissan शोरूम ध्वस्त, पढ़िए – 50 करोड़ नुकसान का दावा !

पटना बुलडोजर कार्रवाई: बिहार की राजधानी पटना में नेशनल हाईवे किनारे अवैध कब्जों और...

Bihar Politics: शिक्षा मंत्री पर 40% कमीशन, पड़ा भारी, RJD नेता पर Defamation Case में कोर्ट का समन

Defamation Case: राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व विधायक प्रेम शंकर यादव की मुश्किलें कम...

IGIMS Patna : विरोध प्रदर्शन, जूनियर डॉक्टरों की गिरफ्तारी पर भड़के छात्र, OPD सेवाएं ठप

आईजीआईएमएस पटना विरोध प्रदर्शन: पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में शुक्रवार को...

बिहार में Pakistan SPY का बड़ा खुलासा, ATS ने मुजफ्फरपुर से दबोचा जासूस मुस्तफा, जानिए बड़ी ख़बर

Muzaffarpur: बिहार में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।...