Gaya Hospital News: गया के प्रतिष्ठित प्रभावती अस्पताल में सुरक्षा गार्डों ने सुबह-सुबह जमकर हंगामा किया है। वे बीते चार महीनों से वेतन न मिलने से खासे नाराज और परेशान हैं। गार्डों का आरोप है कि उन्हें फरवरी से मई 2026 तक का भुगतान अब तक नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
एक ओर गार्ड अपना बकाया वेतन तुरंत जारी करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने इस विवाद में एक नया मोड़ ला दिया है। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। इस पूरे मामले ने वेतन भुगतान और नियुक्ति की वैधता को लेकर दोनों पक्षों को आमने-सामने ला खड़ा किया है।
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वेतन न मिलने से गहराया आर्थिक संकट और नौकरी छोड़ने की चेतावनी
प्रभावती अस्पताल में कार्यरत सुरक्षा गार्डों का कहना है कि उन्हें फरवरी, मार्च, अप्रैल और मई 2026 का वेतन अब तक नहीं मिला है। लगातार वेतन न मिलने के कारण उनके घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। कई गार्ड आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
सुरक्षा गार्डों के सुपरवाइजर और ट्रेनर पंकज कुमार ने मीडिया को बताया कि अस्पताल प्रशासन लगातार उन्हें भुगतान का आश्वासन दे रहा है, लेकिन अभी तक एक भी रुपया जारी नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गार्ड पूरी लगन से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, इसके बावजूद उनका बकाया वेतन लटका हुआ है।
पंकज कुमार ने आगे बताया कि कई सुरक्षाकर्मी अब अपनी नौकरी छोड़ने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अब तक कंपनी पर भरोसा रखा है, लेकिन वेतन न मिलने की यह लंबी अवधि उनके धैर्य की सीमा को तोड़ रही है। गार्डों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो वे कोई बड़ा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
सुरक्षा गार्डों के इस Gaya Salary Protest ने अस्पताल प्रशासन को सवालों के घेरे में ला दिया है। गार्डों का कहना है कि वे बिना वेतन के कब तक काम करते रहेंगे, जबकि उनके परिवार पर आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
अधीक्षक का चौंकाने वाला खुलासा: नियुक्ति में बड़ी अनियमितताएं
अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा ने सुरक्षा गार्डों के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह केवल वेतन भुगतान का मामला नहीं है, बल्कि सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनके मुताबिक, संबंधित गार्डों की तैनाती नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप बिल्कुल भी नहीं की गई थी।
डॉ. वर्मा ने आगे बताया कि जब इन सुरक्षाकर्मियों की नियुक्ति हुई थी, तब संबंधित सुरक्षा एजेंसी के पास आवश्यक लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज मौजूद नहीं थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्राइवेट सिक्योरिटी एक्ट के तहत जिन अनिवार्य औपचारिकताओं का पालन किया जाना चाहिए था, उन्हें पूरा नहीं किया गया था। इस गंभीर चूक के संबंध में एजेंसी को पहले ही लिखित रूप से सूचना भेजी जा चुकी थी।
अस्पताल प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि सुरक्षा एजेंसी लगातार अपने गार्ड बदलती रहती थी और इस बदलाव के बारे में अस्पताल को पूरी जानकारी कभी नहीं दी गई। इस प्रकार की कार्यप्रणाली ने न केवल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाया है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रशासन का कहना है कि यह पूरा मामला विभिन्न स्तरों पर अभी भी विचाराधीन है। यदि संबंधित एजेंसी सक्षम अधिकारियों के निर्देश या सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करती है, तो नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, फिलहाल वेतन भुगतान और इन नियुक्तियों की वैधता दोनों ही मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी तक लंबित है।
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यह विवाद गया के स्वास्थ्य महकमे में गरमा गया है, जहाँ एक तरफ कर्मचारी अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन व्यवस्थागत खामियों को उजागर कर रहा है। इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।







