Bihar New Rail Line: भारत के पूर्वोत्तर राज्य बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब 17 वर्षों से अटकी जालालगढ़-किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना को अब गति मिलने की उम्मीद जगी है। रेलवे बोर्ड और उत्तर पूर्वी सीमांत रेलवे इस परियोजना की संशोधित लागत का अंतिम आकलन कर रहे हैं, जो क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
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लालू यादव ने रखी थी नींव, अब बढ़ेगी लागत
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को वर्ष 2008-09 में स्वीकृति मिली थी। तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने उस समय इसका शिलान्यास किया था। शुरुआती अनुमान के अनुसार, इसकी लागत लगभग 360 करोड़ रुपये थी। हालांकि, भूमि अधिग्रहण में देरी और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण अब इसकी अनुमानित लागत बढ़कर करीब 1852 करोड़ रुपये हो गई है।
51 किलोमीटर लंबी होगी लाइन, मिलेंगी कई सुविधाएं
प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई 51.632 किलोमीटर होगी। यह रेल मार्ग पूर्णिया के जालालगढ़ जंक्शन से शुरू होकर अमौर, बैसा, रौटा, खाताहाट, महीनगांव और दौला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होते हुए किशनगंज तक पहुंचेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए इस रूट पर आठ नए रेलवे स्टेशन भी बनाने की योजना है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस नई लाइन के बनने से न्यू जलपाईगुड़ी से कटिहार जाने वाली ट्रेनों को एक नया और छोटा मार्ग उपलब्ध होगा, जिससे मौजूदा मुकुरिया-किशनगंज रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और यात्री व मालगाड़ी परिचालन में सुधार आएगा। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर के समानांतर एक वैकल्पिक रेल संपर्क प्रदान करेगी।
किसानों और व्यापारियों को मिलेगा सीधा लाभ
अमौर और बैसा जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों के किसानों को इस नई रेल लाइन परियोजना से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। किसान अपनी मक्का, जूट और धान जैसी प्रमुख फसलों को आसानी से सिलीगुड़ी, कोलकाता और दिल्ली की बड़ी मंडियों तक पहुंचा पाएंगे। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और परिवहन लागत में भी कमी आएगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। केंद्र सरकार ने इस परियोजना की लागत को संशोधित कर इसे आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसकी पहल तत्कालीन किशनगंज सांसद मरहूम तस्लीमुद्दीन ने यूपीए सरकार के दौरान की थी। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने भी रेल मंत्रालय द्वारा जल्द ही ठोस कदम उठाए जाने की बात कही है।
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इस परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सीमांचल क्षेत्र की दशकों पुरानी मांग पूरी होगी, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने को भी मजबूत करेगी। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के समन्वय से यह महत्वाकांक्षी योजना जल्द ही धरातल पर उतर सकती है, जिससे लाखों लोगों का जीवन सुधरेगा।







