Kishanganj New Rail Line: कोसी-सीमांचल क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित जलालगढ़-किशनगंज नई रेल लाइन परियोजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है। लगभग 18 वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी इस योजना को लेकर रेलवे के हालिया आंतरिक दस्तावेज़ों, आरटीआई से मिली जानकारी और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक नए प्रस्तावित नक्शे ने स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) ने इस रेल परियोजना के पुराने निर्धारित मार्ग (एलाइनमेंट) को पूरी तरह बदल दिया है?
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क्यों चर्चा में है Kishanganj New Rail Line का नया रूट?
वायरल हो रहे नए नक्शे में ‘कानकी’ क्षेत्र की स्पष्ट मौजूदगी से इस बात को काफी बल मिल रहा है कि मार्ग में बदलाव हुआ है। इस परियोजना को वर्ष 2008-09 में तत्कालीन रेल बजट में स्वीकृति मिली थी, उस समय इसकी कुल लंबाई 50.87 किलोमीटर तय की गई थी। हालांकि, रेलवे के एक आरटीआई उत्तर से यह स्पष्ट हुआ है कि नए तैयार किए गए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में अब इस रेल लाइन की लंबाई बढ़कर 51.632 किलोमीटर हो गई है।
लंबाई में करीब एक किलोमीटर की यह वृद्धि रूट संशोधन की संभावनाओं को और पुख्ता करती है। समय बीतने और नए रूट की कड़ियों के जुड़ने के कारण इस रेल परियोजना की अनुमानित बजटीय लागत अब बढ़कर 1852.32 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है।
परियोजना की बढ़ी लंबाई और लागत का विश्लेषण
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले दो दशकों में सीमांचल की भौगोलिक स्थिति, नए राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण, आबादी के घनत्व और भूमि की उपलब्धता में व्यापक बदलाव आए हैं। ऐसे में, पुराने सर्वे के मुकाबले रेलवे द्वारा वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मार्ग में आंशिक या रणनीतिक परिवर्तन करना इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से बेहद सामान्य बात है। प्रस्तावित नए डिजिटल नक्शे के विश्लेषण से साफ दिखता है कि नई रेल लाइन अब कानकी प्रक्षेत्र को अपने दायरे में ले रही है।
यह पूरा रेल मार्ग किशनगंज के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी ग्रामीण इलाकों की तरफ थोड़ा ज्यादा झुकता नजर आ रहा है। इससे कई नए गांवों के परियोजना से जुड़ने और कुछ पुराने गांवों के रूट से बाहर होने की चर्चाएं तेज हैं। यह देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Seemanchal Rail Project क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है।
कानकी की एंट्री और किशनगंज के पश्चिमी छोर की ओर झुकाव
रूट एलाइनमेंट को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच ठाकुरगंज और किशनगंज के जागरूक नागरिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने रेल मंत्रालय से मांग की है कि इस नई परियोजना का आधिकारिक और विस्तृत थ्री-डी (3D) नक्शा अविलंब सार्वजनिक किया जाए। इससे भूमि अधिग्रहण, नए स्टेशनों के चिन्हांकन और क्षेत्रीय किसानों के मुआवजे से जुड़ी अनिश्चितता पूरी तरह दूर हो सकेगी। यह परियोजना सिर्फ परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार है।
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बहरहाल, इस नई हलचल से इतना तो स्पष्ट है कि वर्षों से लंबित यह परियोजना अब दोबारा गति पकड़ रही है। यदि नया एलाइनमेंट स्वीकृत होता है, तो कानकी सहित सीमांचल के सुदूरवर्ती ग्रामीण प्रक्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को एक नया आयाम मिलेगा, जो पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के लिए एक गेमचेंजर साबित होगा।







