Darbhanga News: दरभंगा जिले के हनुमाननगर स्थित पंचोभ गांव में इन दिनों भक्ति का माहौल है। यहां के दुर्गास्थान मंदिर परिसर में वाराणसी से लाई गई बजरंगबली की प्रतिमा की दो दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ बुधवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान पूरे गांव में धार्मिक उत्साह चरम पर रहा, जिससे आसपास का क्षेत्र भी भक्तिमय हो गया।
दरभंगा का ये गांव ‘जय बजरंगबली’ के नारों से गूंजा, जानिए वाराणसी से आई प्रतिमा की कहानी!
Darbhanga News: दरभंगा, हनुमाननगर। पंचोभ गांव स्थित दुर्गास्थान मंदिर परिसर में बुधवार को दो दिवसीय प्राण-प्रतिष्ठा महायज्ञ का समापन हो गया। वाराणसी से लाई गई बजरंगबली की प्रतिमा की स्थापना के बाद से पूरे गांव में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। वैदिक मंत्रोच्चार और जय बजरंगबली के नारों से पूरा इलाका भक्तिमय हो उठा।




दो दिवसीय अनुष्ठान, 11 अधिवास की प्रक्रिया
इस महायज्ञ का संचालन उत्तर प्रदेश से आए आचार्य डॉ. विभूति नाथ झा, पंडित विष्णु आचार्य और विशाल कुमार मिश्र के नेतृत्व में किया गया। वैदिक विधि-विधान के साथ अनुष्ठान के पहले दिन 11 अधिवास की प्रक्रिया पूरी की गई। अधिवास किसी भी धार्मिक आयोजन में प्रतिमा को स्थापित करने से पहले किए जाने वाले विशेष संस्कार होते हैं, जिनका विशेष महत्व होता है।
हवन और प्राण-प्रतिष्ठा में जुटे सैकड़ों श्रद्धालु
यज्ञ के दूसरे दिन हवन और प्राण-प्रतिष्ठा के मुख्य अनुष्ठान आयोजित किए गए। इन पवित्र आयोजनों में विधान पार्षद हरि सहनी, सरपंच महेश चौधरी (अध्यक्ष) और सुधीर झा (कोषाध्यक्ष) सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। हवन की पवित्र अग्नि में आहुतियां डाली गईं और बजरंगबली के जयकारे लगाए गए, जिससे मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह से भक्ति में डूब गया।
ग्रामीणों में उत्साह, गौरव का क्षण
आचार्यों ने इस दौरान बताया कि प्राण-प्रतिष्ठा जैसे धार्मिक आयोजनों में अधिवास, हवन और अन्य वैदिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। कार्यक्रम के सफल समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। ग्रामीणों ने इस भव्य आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे अपने गांव के लिए गौरव का विषय बताया। यह आयोजन गांव में एकता और धार्मिक चेतना का प्रतीक बन गया है।
वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुए अनुष्ठान
इस पवित्र महायज्ञ का संचालन उत्तर प्रदेश से आए आचार्य डॉ. विभूति नाथ झा, पंडित विष्णु आचार्य और विशाल कुमार मिश्र के नेतृत्व में किया गया। सभी अनुष्ठान वैदिक विधि-विधान के साथ पूर्ण किए गए। महायज्ञ के पहले दिन 11 अधिवास की प्रक्रिया संपन्न की गई, जो किसी भी प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
दूसरे दिन मुख्य रूप से हवन और प्राण-प्रतिष्ठा के अनुष्ठान आयोजित किए गए। इन धार्मिक क्रियाओं में विधान पार्षद हरि सहनी, मंदिर समिति के अध्यक्ष सह सरपंच महेश चौधरी और कोषाध्यक्ष सुधीर झा सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, हवन में दी गई आहुतियां और ‘जय बजरंगबली’ के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
गांव में भक्तिमय वातावरण और सामुदायिक गौरव
आचार्यों ने प्राण-प्रतिष्ठा जैसे धार्मिक आयोजनों में अधिवास, हवन और वैदिक अनुष्ठानों के विशेष महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये प्रक्रियाएं प्रतिमा में दैवीय चेतना जागृत करने के लिए आवश्यक हैं। कार्यक्रम के सफल समापन के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
ग्रामीणों ने इस भव्य आयोजन की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए इसे अपने गांव के लिए गौरव का विषय बताया। इस महायज्ञ ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि पूरे समुदाय को एक साथ लाने और उनमें एकजुटता की भावना को भी बढ़ावा दिया। यह आयोजन दरभंगा के हनुमाननगर क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बन गया है।







