Bihar Police Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में हुए एक कथित पुलिस एनकाउंटर ने पूरे देश में एक नया राजनीतिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। 17 जून को भोजपुर के बिलौटी गाँव के 26 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत के बाद बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
पुलिस जहाँ तिवारी को अपराधी बता रही है, वहीं स्थानीय जनता और उनके परिवार उन्हें जन-मुद्दे उठाने वाला ‘मसीहा’ करार दे रहे हैं। इस घटना के बाद, लापरवाही के आरोप में पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित भी कर दिया गया है।






पुलिस का दावा बनाम परिवार का आरोप: एनकाउंटर की कहानी
पुलिस के अनुसार, जब एक टीम ने भरत भूषण तिवारी को गिरफ्तार करने का प्रयास किया, तो उसने कथित तौर पर अवैध हथियार से अधिकारियों पर गोली चला दी। पुलिस ने दावा किया कि आत्मरक्षा में जवाबी गोलीबारी की गई, जिसमें तिवारी घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हालांकि, तिवारी के परिवार ने पुलिस के इस बयान का कड़ा विरोध किया है। उनका आरोप है कि गोलीबारी से पहले ही तिवारी ने सरेंडर कर दिया था और अपना हथियार फेंक दिया था। परिवार ने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दिख रहा है कि जब पुलिस ने उन पर गोली चलाई, तब तिवारी निहत्था थे।
मेरे बेटे को दो गोलियां लगीं। वह बहुत अच्छे इंसान थे। वह समाज के लिए काम करते थे और गरीबों के लिए मसीहा थे। उनकी हत्या उनके समाज सेवा के कामों की वजह से की गई। मैं इस आदेश के लिए DSP को जिम्मेदार मानती हूं और मांग करती हूं कि उन्हें मौत की सजा दी जाए। न्याय के लिए हमारी गुहार कोई नहीं सुन रहा है। आशा देवी, भरत भूषण तिवारी की मां
सुप्रीम कोर्ट और CBI जांच की मांग: न्याय की लड़ाई
भरत भूषण तिवारी की कथित ‘एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग’ (न्यायेतर हत्या) की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। इसके साथ ही, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) से भी इस मामले की जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि एनकाउंटर से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है।
भरत भूषण तिवारी भोजपुर के शाहपुर इलाके के बिलौटी गाँव के रहने वाले थे। वे सोशल मीडिया के माध्यम से जन-मुद्दे उठाने के लिए स्थानीय स्तर पर काफी जाने जाते थे। उनके परिवार के मुताबिक, तिवारी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। वे अक्सर बाढ़, नदी के कटाव, विस्थापन और स्थानीय समुदायों की परेशानियों से जुड़े मुद्दों को उठाते थे। परिवार उन्हें समाज के गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए काम करने वाला सामाजिक कार्यकर्ता बताता है।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच के आदेश
इस एनकाउंटर को लेकर बढ़ते विवाद के बीच, कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) सुधांशु कुमार ने जानकारी दी कि एनकाउंटर से एक दिन पहले, 16 जून को पुलिस की एक टीम तिवारी से बात करने गई थी, लेकिन वे स्थिति को सही ढंग से नहीं संभाल पाए।
लापरवाही के आरोप में एक स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO), दो सब-इंस्पेक्टर (SI), एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) और एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है। सुधांशु कुमार, एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG)
तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन, पुलिस अवर निरीक्षक हरिश्चंद्र कुमार, सहायक अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं। पहले सिर्फ राजेश कुमार मालाकार का ही नाम सामने आया था।
उन्होंने आगे बताया कि शाहाबाद रेंज के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) को इस मामले की जांच करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, बिहार पुलिस ने इस मामले की जांच हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज से कराने का फैसला किया है। इस घटना के सिलसिले में पहले ही दो FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जो मामले की गंभीरता को दर्शाती हैं। परिवार और स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि इस जांच से न्याय मिल पाएगा और सच्चाई सामने आएगी।







