Patna News: बिहार की राजधानी पटना की शान और ब्रिटिश काल की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारत गोलघर अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के बजाय प्रेम संदेशों और ग्रैफिटी का शिकार बन गई है। इसकी दीवारों पर जगह-जगह उकेरे गए नाम, दिल के निशान, ‘आई लव यू’, ‘सॉरी बाबू’ जैसे संदेश और प्रेमी जोड़ों के इजहार इस 18वीं सदी की विरासत को एक आम ‘लव वॉल’ में बदल चुके हैं। यह दृश्य न केवल ऐतिहासिक धरोहर की अवमानना है, बल्कि नागरिकों की लापरवाही और जागरूकता की कमी का भी शर्मनाक उदाहरण पेश करता है।
गोलघर का गौरवशाली इतिहास
गोलघर का निर्माण वर्ष 1786 में कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा अंग्रेजी शासनकाल में अकाल राहत के लिए एक विशाल अनाज भंडार के रूप में किया गया था। यह अपनी अनोखी वास्तुकला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। 29 मीटर ऊंची यह स्तंभ रहित गोलाकार इमारत 3.6 मीटर मोटी दीवारों वाली है, जो इसकी मजबूती और इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है। इसमें 145 सीढ़ियों वाली सर्पिल सीढ़ी चढ़कर ऊपर से गंगा नदी और पूरे पटना शहर का मनमोहक नजारा देखा जा सकता है। गांधी मैदान के निकट स्थित यह स्थल बिहार पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक और स्थानीय लोग पहुंचते हैं।






प्रेम संदेशों से पटी दीवारें: वर्तमान स्थिति
हालांकि, वर्तमान स्थिति अत्यंत दुखद है। गोलघर की बाहरी दीवारों पर पेंट, मार्कर और नुकीली चीजों से खुरचकर लिखे गए संदेश अब एक आम नजारा बन गए हैं। कुछ लोगों ने तो यहां ‘प्यार’ का इजहार किया है, तो कुछ ने रिश्तों में आई दरार के लिए ‘सॉरी’ लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया है। नाम, मोबाइल नंबर, दिल-तोड़ने वाले मैसेज और यहां तक कि राजनीतिक या व्यक्तिगत नारेबाजी भी इन दीवारों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो में यह साफ दिख रहा है कि कैसे यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे अपनी पहचान खोकर बर्बादी की ओर अग्रसर है। यह स्थिति न केवल गोलघर की ऐतिहासिक गरिमा को धूमिल कर रही है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि हम अपनी विरासत के प्रति कितने गंभीर हैं।
जागरूकता की कमी और भविष्य की चुनौती
गोलघर जैसी अमूल्य धरोहर का इस तरह से अपमान होना समाज में जागरूकता की कमी को दर्शाता है। इन कृत्यों को रोकने और गोलघर के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। प्रशासन को सख्त नियम बनाने चाहिए और नागरिकों को भी अपनी ऐतिहासिक विरासत के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव दिखाना होगा, तभी हम अपनी धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रख पाएंगे।








