Bihar Police Recruitment: बिहार में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. वैशाली जिले के हाजीपुर में बिहार पुलिस सिपाही चालक भर्ती परीक्षा में भारी अनियमितता का खुलासा हुआ है. परीक्षा के दौरान वीक्षकों के पास उत्तर लिखी हुई पर्ची मिली है, जिसके बाद हड़कंप मच गया. इस मामले में केंद्र अधीक्षक सहित तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है.
परीक्षा केंद्र पर पकड़ी गई संदिग्ध गतिविधि
केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती), बिहार द्वारा आयोजित सिपाही चालक लिखित परीक्षा के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई. हाजीपुर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और स्टैटिक दंडाधिकारी सुशील कुमार की ड्यूटी हाजीपुर के नोबेल क्रिएटिव एकेडमी, वासुदेवपुर चपुता परीक्षा केंद्र पर थी. परीक्षा समाप्त होने के बाद जोनल दंडाधिकारी तनुजा और पुलिस पदाधिकारी प्रमोद सिंह के साथ निरीक्षण किया गया. इस दौरान कक्ष संख्या-1 में दो वीक्षक संदिग्ध गतिविधि करते हुए पाए गए.






जांच के क्रम में वीक्षक मुकुल कुमार के हाथ में एक कागज का टुकड़ा बरामद हुआ. आरोप है कि इस पर्ची पर प्रश्न संख्या 1 से 100 तक के संभावित उत्तर क्रमवार लिखे हुए थे. अधिकारियों ने तत्काल पर्ची को जब्त कर दोनों वीक्षकों से गहन पूछताछ शुरू कर दी.
केंद्र अधीक्षक पर गंभीर आरोप, FIR दर्ज
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि पूछताछ चल ही रही थी कि केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना वहां पहुंच गईं. उन्होंने अधिकारियों से बहस करते हुए दोनों वीक्षकों को वहां से जाने दिया. शिकायत में कहा गया है कि बार-बार बुलाने के बावजूद डॉ. आराधना ने वीक्षकों को वापस नहीं बुलाया और न ही नियमानुसार कोई कार्रवाई की. उन्होंने थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने से भी इंकार कर दिया, जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध हो गई.
स्टैटिक दंडाधिकारी सुशील कुमार की शिकायत पर काजीपुर थाना में वीक्षक मुकुल कुमार, सचिन कुमार, केंद्र अधीक्षक डॉ. आराधना तथा अन्य के विरुद्ध संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परीक्षा में संदिग्ध गतिविधि केंद्र अधीक्षक की मिलीभगत से की गई.
पुलिस जांच में जुटी, होगी कड़ी कार्रवाई
काजीपुर थाना पुलिस ने इस गंभीर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस ने जब्त उत्तर पत्रक, परीक्षा केंद्र की गतिविधियों और अन्य सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है. इस घटना से बिहार पुलिस भर्ती की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है.








