Bhagalpur Park Controversy: बिहार के भागलपुर में विकास के नाम पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम वार्ड संख्या-19 स्थित भागलपुर के टी.एनबी कॉलेजिएट स्कूल के करीब 100 साल पुराने मैदान में अमृत 2.0 योजना के तहत पार्क निर्माण का काम शुरू होते ही विरोध की चिंगारी भड़क उठी है। पूर्ववर्ती छात्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मैदान पीढ़ियों से बच्चों के खेलने की जगह रहा है, जिसे पार्क बनाने के नाम पर छीना जा रहा है।
छात्रों के खेल का मैदान या विकास की भेंट?
नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री नीतीश मिश्रा ने जिस 2 करोड़ 32 लाख रुपये की लागत वाली पार्क परियोजना का शिलान्यास किया था, अब वही परियोजना सवालों के घेरे में है। शिलान्यास के बाद मैदान की घेराबंदी का काम शुरू हुआ, लेकिन इसके साथ ही स्कूल के पूर्व छात्र और स्थानीय नागरिक मैदान में उतर आए। उनका स्पष्ट सवाल है कि अगर यह ऐतिहासिक खेल का मैदान पार्क में बदल गया, तो आने वाली पीढ़ियों के बच्चे कहां खेलेंगे? क्या विकास की दौड़ में छात्रों से उनके खेलने का अधिकार छीन लिया जाएगा?






मंत्री के शिलान्यास के बाद क्यों गहराया विवाद?
यह मैदान सिर्फ एक खाली जमीन नहीं, बल्कि टी.एनबी कॉलेजिएट स्कूल का अभिन्न हिस्सा रहा है, जहां कई पीढ़ियों ने खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लिया है। स्थानीय लोगों का तर्क है कि पार्क निर्माण से इस स्कूल की पहचान और छात्रों के शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उनका विरोध इस बात पर केंद्रित है कि एक ऐसे सार्वजनिक स्थान को, जिसका दशकों से एक निश्चित उपयोग रहा है, उसे बिना व्यापक जन सहमति के बदला जा रहा है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने दिए जांच के आदेश, क्या मिलेगी राहत?
इस पूरे मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा है कि उन्हें इस निर्माण कार्य की कोई जानकारी नहीं थी और अब पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यह बयान विवाद को और गहरा करता है, क्योंकि सवाल उठता है कि शिक्षा विभाग की जानकारी के बिना स्कूल परिसर में इतने बड़े निर्माण की अनुमति कैसे मिल गई। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह छात्रों की खेल सुविधाओं को प्राथमिकता देगा, या पार्क निर्माण की योजना निर्बाध रूप से आगे बढ़ेगी। फिलहाल, टी.एनबी कॉलेजिएट स्कूल का मैदान विकास और छात्रों के अधिकार के बीच एक बड़े प्रश्नचिह्न के रूप में खड़ा है।
भागलपुर में यह विवाद स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ जहां विकास परियोजनाओं को गति देने का दबाव है, वहीं दूसरी ओर छात्रों और स्थानीय समुदाय की भावनाओं और उनके भविष्य का सवाल है। आने वाले दिनों में जिला शिक्षा पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट और प्रशासन का अगला कदम ही तय करेगा कि इस 100 साल पुराने मैदान का भविष्य क्या होगा और भागलपुर के बच्चों को उनका खेल का मैदान वापस मिलेगा या नहीं।








