Bihar Revenue Deficit: कभी अपने राजस्व बजट में बचत दिखाने वाला बिहार अब राजस्व घाटे वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। कैग (CAG) की हालिया रिपोर्ट ने राज्य की वित्तीय स्थिति में गंभीर गिरावट का खुलासा किया है, जिसने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है। यह बदलाव राज्य के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका माना जा रहा है।
राज्य के राजस्व बचत से घाटे में आने का मुख्य कारण वेतन, पेंशन और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर बेतहाशा बढ़ता खर्च बताया जा रहा है। इन मदों पर अत्यधिक व्यय ने राज्य के वित्तीय संतुलन को बिगाड़ दिया है। साथ ही, राजस्व की कम प्राप्तियां भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं, जिससे राजकोषीय अनुशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं।






बिहार की वित्तीय सेहत को लगा बड़ा झटका
कैग की रिपोर्ट बताती है कि बिहार ने कुछ समय के लिए अपने राजस्व बजट में बचत की स्थिति बनाए रखी थी। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से वेतन-पेंशन और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर लगातार बढ़ते खर्च ने इस बचत को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब राज्य को अपनी आय से अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे राजस्व घाटे की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
बढ़ता खर्च और कम राजस्व वसूली बनी चुनौती
कल्याणकारी योजनाओं पर भारी-भरकम खर्च करना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है, लेकिन इसके साथ ही राजस्व की अपेक्षित वसूली न हो पाना एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। इस असंतुलन ने राज्य की वित्तीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। कैग की यह रिपोर्ट राज्य के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है, जो वित्तीय प्रबंधन में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर देती है।
राजकोषीय अनुशासन के लिए गंभीर चेतावनी
बिहार का राजस्व बचत से राजस्व घाटे में फिसलना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य के राजकोषीय अनुशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रवृत्ति को जल्द नहीं रोका गया, तो राज्य को आने वाले समय में और भी बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार को खर्चों पर नियंत्रण और राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि राज्य फिर से वित्तीय स्थिरता की राह पर लौट सके।








