Bihar Kabir Seva Sansthan: बिहार के दरभंगा में कबीर सेवा संस्थान ने अपनी स्थापना के 13 साल पूरे कर लिए हैं। कबीर जयंती के पावन अवसर पर मुफ्ती मुहल्ला स्थित संस्थान के कार्यालय में वार्षिकोत्सव मनाया गया। इस दौरान सदस्यों ने कबीर के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके बताए सेवा मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह संस्थान पिछले 12 वर्षों से लगातार समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है, जिसमें अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार और शव वाहन जैसी सेवाएं प्रमुख हैं।
कबीर सेवा संस्थान: 2014 से अनवरत सेवा का सफर
कबीर सेवा संस्थान की नींव वर्ष 2014 में कबीर जयंती के दिन ही रखी गई थी। तब से लेकर आज तक, यह संस्था बिना किसी सरकारी मदद के, अपने संसाधनों से मानवीय सेवाएं प्रदान कर रही है। अज्ञात शवों की अंत्येष्टि से लेकर शव वाहन सेवा और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराने तक, संस्थान ने कई जरूरतमंदों की सहायता की है।






संस्थान के अध्यक्ष श्री भोला गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में सदस्यों ने अपनी सेवा को आगे भी इसी निष्ठा से जारी रखने का प्रण किया।
कोरोना काल में बना सहारा, अमेरिका से मिला सहयोग
कोरोना महामारी के कठिन दौर में कबीर सेवा संस्थान ने असाधारण सेवाएँ दीं। इस दौरान संस्थान के प्रयासों को देखते हुए अमेरिकी संस्था ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन, अमेरिका’ ने उन्हें बिजली और गैस से संचालित एक शवदाह संयंत्र प्रदान किया। संस्थान ने यह शवदाह संयंत्र दरभंगा जिला प्रशासन को सौंप दिया, जिसे भिगो शमशान घाट में स्थापित किया गया। यह संयंत्र आज भी पूरी तरह से कार्यरत है और क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा बना हुआ है।
बिना सरकारी अनुदान, अपने दम पर जारी है समाज सेवा
कबीर सेवा संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से आत्मनिर्भर है। संस्थान किसी भी सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि अपने आंतरिक संसाधनों से ही सभी सेवाएं संचालित करता है। अंत्येष्टि से लेकर शव को सुरक्षित रखने के लिए मर्चरी (शव रखने का संयंत्र) सेवा और शवों को शमशान घाट तक पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है। संस्थान के सदस्यों का यह दृढ़ संकल्प ही उसे समाज सेवा के इस पवित्र कार्य में लगातार सक्रिय बनाए हुए है।








