Bihar 3D Printing: बिहार के युवाओं को आधुनिक औद्योगिक तकनीकों से जोड़ने और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज (DCE) में ‘Additive Manufacturing: Processes, Materials, Design and Emerging Applications’ विषय पर दो दिवसीय ऑनलाइन विशेषज्ञ व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम ने छात्रों और शिक्षकों को 3D प्रिंटिंग की दुनिया की नवीनतम जानकारी प्रदान की, जिससे राज्य में तकनीकी शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं को नई गति मिली है।
दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज के Specialized Centre on 3D Printing & Additive Manufacturing ने Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC), Kolkata के सहयोग से इस महत्वपूर्ण वेबिनार का आयोजन 27 और 29 जून, 2026 को किया। इसमें विभिन्न इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।






3D प्रिंटिंग: भविष्य के उद्योगों की नींव
कार्यक्रम का संयोजन श्री प्रफुल्ल चंद्र, सहायक प्राध्यापक एवं फैकल्टी-इन-चार्ज, C-DAC लैब ने किया, जबकि प्राचार्य प्रो. (डॉ.) चंदन कुमार के संरक्षण में यह सफल रहा। डॉ. डी. वाई. पाटिल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पिंपरी, पुणे के सहायक प्राध्यापक डॉ. स्वरूप कुमार मंडल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने पहले दिन एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मूल अवधारणाओं, विभिन्न निर्माण प्रक्रियाओं, प्रयुक्त सामग्रियों, डिजाइन सिद्धांतों और आधुनिक औद्योगिक अनुप्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की। डॉ. मंडल ने स्पष्ट किया कि कैसे 3D प्रिंटिंग तकनीक पारंपरिक विनिर्माण में क्रांति ला रही है और भविष्य के उद्योगों में इसकी भूमिका व रोजगार की संभावनाएँ बढ़ रही हैं।
ऑटोमोबाइल से चिकित्सा तक, 3D प्रिंटिंग के अनूठे उदाहरण
वेबिनार के दूसरे दिन, डॉ. मंडल ने ऑटोमोबाइल, चिकित्सा, एयरोस्पेस और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के वास्तविक औद्योगिक उपयोगों को उदाहरणों के साथ समझाया। उन्होंने F1 गियरबॉक्स, इंजन हाउसिंग, ऑर्थोपेडिक एवं डेंटल इम्प्लांट्स, टिश्यू स्कैफोल्ड्स, हियरिंग एड्स और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स जैसे सफल उत्पादों का उल्लेख किया। इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने बताया कि कैसे 3D प्रिंटिंग तकनीक हल्के, जटिल, उच्च गुणवत्ता वाले और कस्टमाइज्ड उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने नवीनतम तकनीकों, डिजाइन ऑप्टिमाइजेशन और करियर अवसरों पर भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। दोनों सत्रों में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और तकनीकी प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. मंडल ने व्यावहारिक उदाहरणों के साथ विस्तारपूर्वक उत्तर दिया। यह संवादात्मक सत्र सभी प्रतिभागियों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा।
प्रो. (डॉ.) चंदन कुमार, प्राचार्य, दरभंगा इंजीनियरिंग कॉलेज ने अपने संदेश में कहा, ‘इस प्रकार के विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों को नवीनतम औद्योगिक तकनीकों से परिचित कराने तथा उन्हें उद्योग-तैयार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कॉलेज में स्थापित Specialized Centre on 3D Printing & Additive Manufacturing छात्रों को आधुनिक विनिर्माण तकनीकों में उत्कृष्ट प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।’
कार्यक्रम के अंत में, श्री प्रफुल्ल चंद्र, सहायक प्राध्यापक एवं फैकल्टी-इन-चार्ज, C-DAC लैब ने मुख्य वक्ता डॉ. स्वरूप कुमार मंडल, C-DAC Kolkata और सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तरह के विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान और उद्योगोन्मुख कौशल विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे, जिससे बिहार के युवा तकनीकी रूप से सशक्त होकर भविष्य के औद्योगिक परिदृश्य में अपनी जगह बना सकेंगे।








