Araria Drug Trafficking: बिहार के अररिया जिले में एक बड़े गांजा तस्करी के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ विनीत कुमार सिंह की अदालत ने 602 किलोग्राम गांजा के साथ पकड़े गए ट्रक चालक रंजीत कुमार राय को चौदह वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की रकम अदा न करने पर रंजीत को छह महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
कैसे पकड़ा गया 602 किलो गांजा?
यह मामला 14 सितंबर 2023 की आधी रात का है, जब रात्रि सवा बारह बजे एक गुप्त सूचना के आधार पर अररिया पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। तत्कालीन थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक निर्मल कुमार यादवेंदु के नेतृत्व में पुलिस ने ट्रक रजिस्ट्रेशन नंबर एनएल 01 एए-8566 की तलाशी ली। ट्रक आसाम से आ रहा था। तलाशी के दौरान पुलिस को ट्रक के डाला में एक तहखाना मिला, जिसमें तीन अतिरिक्त बक्से नट बोल्ट से कसकर बनाए गए थे। इन बक्सों से कुल 77 पैकेट गांजा बरामद हुआ, जिसका कुल वजन 602 किलोग्राम था।






“अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ विनीत कुमार सिंह की अदालत ने ट्रक चालक को चौदह वर्ष की सश्रम कारावास और एक लाख रूपये के जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने जुर्माने की रकम अदा नहीं करने पर दोषी ट्रक चालक को छह महीने तक की अतिरिक्त सजा भुगतने का भी आदेश दिया।”
फर्जी नंबर प्लेट से चल रहा था ट्रक, ऐसे खुली पोल
जांच में पता चला कि जिस ट्रक से गांजा तस्करी की जा रही थी, उसका रजिस्ट्रेशन नंबर एनएल 01 एए-8566 फर्जी था। पुलिस अनुसंधान में यह सामने आया कि ट्रक का असली और मूल रजिस्ट्रेशन नंबर आरजे 02 जीए-8279 था। बरामद किए गए मादक पदार्थ को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया, जहां जांच में गांजा होने की पुष्टि हुई। इस मामले में पुलिस ने रंजीत कुमार राय के अलावा ट्रक मालिक अर्शदीप, रवि कुमार, मंजीत राय, संजय राय, अरुण राय, राजेश राय और एक अन्य ट्रक चालक सहित कुल आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया था। हालांकि, पुलिस अनुसंधानकर्ता ने केवल रंजीत राय के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित किया, जबकि अन्य सात आरोपियों के विरुद्ध अभी भी अनुसंधान जारी है।
न्यायालय में क्या हुआ? सरकारी वकील और बचाव पक्ष की दलीलें
विशेष एनडीपीएस वाद संख्या 83/2023 के तहत हुई इस सुनवाई में सरकार की ओर से अभियोजन पक्ष ने कुल छह गवाहों के बयान न्यायालय में पेश किए। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान, लीगल एड डिफेंस काउंसिल (एलएडीसी) की ओर से बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह रंजीत का पहला अपराध है, इसलिए उसे कम से कम सजा दी जाए। वहीं, विशेष लोक अभियोजक एनडीपीएस अशोक कुमार मिश्रा ने न्यायालय से दोषी को विधि सम्मत और कठोर सजा सुनाने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने वैशाली जिला के फतेहपुर थाना क्षेत्र के गामा वार्ड संख्या 10 के निवासी रंजीत कुमार राय को दोषी करार देते हुए सजा तय की। यह फैसला बिहार में गांजा तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








