Bihar Land Records: बिहार में जमीन संबंधी विवादों का निपटारा अब और भी पेचीदा हो सकता है। भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल में 430 गांवों के महत्वपूर्ण कैडेस्ट्रल सर्वे दस्तावेज या तो गायब हो चुके हैं या बुरी तरह क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी एक सूची ने इस गंभीर लापरवाही का खुलासा किया है, जिससे हजारों लोगों के भूमि स्वामित्व पर संकट मंडरा रहा है। यह स्थिति बिहार लैंड रिकॉर्ड्स के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि कहलगांव अनुमंडल के 430 मौजों (गांवों) से जुड़े कैडेस्ट्रल सर्वे के कागजात रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं हैं। कई दस्तावेज ऐसे हैं जो उपलब्ध तो हैं, लेकिन वे इतनी खराब स्थिति में हैं कि उन्हें ‘रद्दी’ घोषित कर दिया गया है। इस चौंकाने वाली जानकारी ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है और आम जनता में चिंता बढ़ा दी है।






कहलगांव अंचल के 205 गांवों पर सबसे ज्यादा असर
इस बड़ी लापरवाही का सबसे ज्यादा असर कहलगांव अंचल क्षेत्र पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले कहलगांव अंचल के 205 गांवों के दस्तावेज गायब या क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। यह आंकड़ा कुल प्रभावित गांवों का लगभग आधा है, जो इस क्षेत्र में भूमि संबंधी समस्याओं को और गहरा करेगा। जमीन के कागजात नहीं होने से खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों में भारी दिक्कतें आएंगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी सूची में सामने आया है कि कहलगांव अनुमंडल के 430 मौजों के कैडेस्ट्रल सर्वे से जुड़े कागजात रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नहीं हैं। अगर उपलब्ध है भी तो रद्दी है।
भू-अभिलेखों के गायब होने से बढ़ेगी परेशानी
जमीन संबंधी कैडेस्ट्रल सर्वे दस्तावेज किसी भी भूमि के स्वामित्व और उसके अधिकार का सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण होते हैं। इनके गायब होने या क्षतिग्रस्त होने से भूमि विवादों का समाधान करना लगभग असंभव हो जाएगा। लोग अपनी जमीन के मालिकाना हक को साबित करने में कठिनाई महसूस करेंगे, जिससे अदालती मामलों की संख्या में वृद्धि होने की आशंका है। इस समस्या का सीधा असर आम ग्रामीणों और किसानों पर पड़ेगा।
राजस्व विभाग की सूची ने खोली पोल
यह मामला तब प्रकाश में आया जब राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध और अनुपलब्ध दस्तावेजों की सूची जारी की। इस सूची ने सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और दस्तावेजों के रखरखाव में बरती जा रही गंभीर लापरवाही की पोल खोल दी है। विभाग को अब इन गायब दस्तावेजों को फिर से तैयार करने या उनकी वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग पर बड़ी जिम्मेदारी है। गायब हुए इन दस्तावेजों के कारण भूमि विवादों का समाधान करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, और इससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर इन भू-अभिलेखों को संरक्षित करने या उनके पुनर्निर्माण का रास्ता खोजना होगा ताकि लोगों के अधिकारों की रक्षा हो सके।








