Bihar Rural Development: बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अब जल्द ही आर्थिक क्रांति का नया दौर शुरू होने वाला है। राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि अगले पाँच वर्षों के भीतर हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक अत्याधुनिक हाट-बाजार बनकर तैयार हो जाएगा। इस योजना का सीधा लाभ बिहार की जीविका दीदियों, किसानों और ग्रामीण गरीबों को मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
शुक्रवार को पटना में नाबार्ड और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री श्रवण कुमार ने ग्रामीण विकास की दिशा में कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ग्रामीण विकास के लिए बनने वाली हर योजना में गरीब-गुरबा की जरूरतों और उनके रोजगार को विशेष प्राथमिकता दी जाए।






पर्यटन स्थलों पर हाट-बाजार, जीविका दीदियों को मिलेगा नया मंच
मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों को राज्य के पर्यटन केंद्रों पर आधुनिक हाट बनाने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि इन हाट-बाजारों के माध्यम से जीविका दीदियों और किसानों द्वारा उत्पादित वस्तुओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलेगी। इससे न केवल उनके उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने नाबार्ड के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही उनकी योजनाओं और हाट-बाजार बनाने में संभावित सहयोग की विस्तृत जानकारी ली।
ग्रामीण विकास के लिए बनने वाली योजनाओं में गरीब-गुरबा की जरूरतों और उनके रोजगार का विशेष ख्याल रखा जाए।
– मंत्री श्रवण कुमार
कौशल विकास और रोजगार पर जोर: प्लंबर ट्रेनिंग से बकरी पालन तक
ग्रामीण विकास मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को जीविका दीदी और दूसरे गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजनाओं का चयन प्राथमिकता के आधार पर करने को कहा। उन्होंने पायलट प्रोजेक्ट के तहत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए एजेंसी का सहयोग लेने पर बल दिया। मंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए:
- जीविका दीदियों और अन्य लोगों को प्लंबर की ट्रेनिंग दी जाए।
- खेल मैदानों का निर्माण व्यवस्थित तरीके से किया जाए।
- ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने और खाली पड़े सरकारी भवनों को चिन्हित कर उन्हें हाट या बाजार के रूप में विकसित किया जाए।
मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जीविका दीदियों के कौशल विकास के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बना सकें और उनकी मार्केटिंग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आसान हो। उन्होंने प्रखंड स्तर पर कम से कम 10 महिला और युवतियों को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए, ताकि वे स्वयं कुशल बनकर दूसरों को भी प्रशिक्षित कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में प्लंबर की भारी मांग को देखते हुए जरूरतमंदों को ट्रेनिंग दिलाने की योजना तैयार करने को भी कहा गया।
जीविका दीदी और दूसरे गरीबों को रोजगार उपलब्ध कराने से संबंधित योजनाओं का चयन प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।
– मंत्री श्रवण कुमार
नाबार्ड के साथ मिलकर बिहार ग्रामीण विकास को मिलेगी मजबूती
बैठक में विभागीय प्रधान सचिव पंकज कुमार ने नाबार्ड के अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों की योजनाओं की एक विस्तृत पीपीटी (प्रेजेंटेशन) मांगी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास से संबंधित लक्ष्यों को सही तरीके से पूरा किया जा सकेगा। मंत्री श्रवण कुमार ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि आगामी पाँच वर्षों के भीतर हर ग्राम पंचायत में कम से कम एक हाट बनकर तैयार हो जाए। उन्होंने सभी हाट को डिजिटल मार्केट से जोड़ने के लिए आवश्यक सुविधाओं को लागू करने पर भी जोर दिया।
बैठक में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, वीबी-जी राम जी योजना की आयुक्त अनन्या सिंह, नाबार्ड, पटना के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह, उप महाप्रबंधक लक्ष्मण कुमार और मंत्री श्रवण कुमार के आप्त सचिव सुनील कुमार सहित कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री ने पहाड़ी इलाकों, विशेषकर पश्चिम चंपारण, मुंगेर और नवादा जैसे जिलों में बकरी पालन को बढ़ावा देने का प्रस्ताव तैयार करने को भी कहा, क्योंकि इससे इन क्षेत्रों के गरीबों, खासकर महिलाओं को आजीविका का एक मजबूत मंच मिलेगा। आदिवासी इलाकों में पशुपालन को बढ़ावा देने और लोगों को जागरूक करने के लिए भी अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए।
यह पहल ग्रामीण बिहार के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकती है, जो स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़कर और कौशल विकास के माध्यम से ग्रामीण आबादी को सशक्त करेगी।








