Madhubani News: बिहार के मधुबनी जिले में एक जघन्य हत्याकांड में न्याय का दरवाजा खुला है। झंझारपुर व्यवहार न्यायालय के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-तृतीय अनिल कुमार राम की अदालत ने बहुचर्चित अमित कुमार यादव हत्याकांड में दो अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने हत्या और आपराधिक षड्यंत्र के इन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही मृतक की पत्नी को मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
अदालत ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए प्रकाश मिश्रा उर्फ लादेन और किशोरी यादव उर्फ किशोर कुमार यादव को भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 302 (हत्या) तथा धारा 120बी/34 (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी पाया। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यदि यह जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो उन्हें तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि विचारण के दौरान अभियुक्तों द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-428 के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा।






जघन्य हत्याकांड में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
अपर लोक अभियोजक देवशंकर झा ने बताया कि इस मामले की प्राथमिकी फुलपरास थाना में 12 अक्टूबर 2023 को सीता देवी द्वारा दर्ज कराई गई थी। प्राथमिकी के अनुसार, सीता देवी के बेटे अमित कुमार यादव को किशोरी यादव और कुछ अन्य लोग भोजन कराने के बहाने अपने साथ ले गए थे। इसके बाद रातभर उसकी तलाश की गई, लेकिन अमित का कहीं पता नहीं चला। अगले दिन धनौजा-बहुअरवा नहर में एक बोरे में बंधा हुआ शव पानी में तैरता मिला, जिसके सिर और पैर कटे हुए थे। बाद में इस शव की पहचान अमित कुमार यादव के रूप में हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है।
मुआवजा योजना से मिलेगी पत्नी को मदद
अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मधुबनी को यह भी निर्देश दिया है कि बिहार विक्टिम कम्पेनसेशन स्कीम-2014 के तहत मृतक अमित कुमार यादव की पत्नी कंचन कुमारी को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। यह आदेश पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक देवशंकर झा और सूचिका की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार सिन्हा ने पैरवी की। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय कुमार प्रसाद ने अपनी दलीलें पेश कीं। फैसले के बाद, सूचिका पक्ष ने इसे न्याय की जीत बताया है। यह निर्णय अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है और समाज में कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करता है।
सूचिका पक्ष ने फैसले को न्याय की जीत बताया।








