Madhubani News: बिहार के मधुबनी जिले में स्थित बलिराजगढ़ उत्खनन स्थल पर पुरातत्वविदों को प्राचीन संरचनाओं और कलाकृतियों का एक बड़ा संग्रह मिला है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अब इस स्थल पर अगले 10 वर्षों तक वैज्ञानिक उत्खनन जारी रखने की योजना बनाई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने इन महत्वपूर्ण खोजों की जानकारी साझा की, जिससे इस ऐतिहासिक स्थल के पुरातात्विक महत्व पर प्रकाश पड़ा है।
बलिराजगढ़ में मिलीं महत्वपूर्ण प्राचीन संरचनाएं
संजय कुमार झा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में उत्खनन कार्य दो मुख्य क्षेत्रों पर केंद्रित है: प्राचीन किले की दीवार और उसके ठीक दक्षिण में स्थित भूमि। पुरातत्वविदों ने यहां ईंट की दीवारें, सात-परत वाली ईंट की संरचना, आंगन, फर्श, रिंग वेल और जल निकासी प्रणाली से सुसज्जित सोख पिट (सोख्ता गड्ढे) का पता लगाया है। ये खोजें प्राचीन बस्ती की शहरी योजना और बुनियादी ढांचे के बारे में नई जानकारी प्रदान करती हैं।






“यह जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई कि मधुबनी जिले में स्थित ऐतिहासिक ‘बलिराजगढ़’ उत्खनन स्थल से अनेक बहुमूल्य संरचनात्मक अवशेष और प्राचीन वस्तुएं (पुराशेष) प्राप्त हुई हैं।” – संजय कुमार झा
खुदाई में विभिन्न प्रकार के मिट्टी के बर्तन, सिक्के, मुहरें, टेराकोटा की मूर्तियां, खिलौने और पत्थर की गेंदें भी मिली हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि ये कलाकृतियां क्षेत्र के प्राचीन निवासियों की जीवनशैली और विभिन्न सांस्कृतिक चरणों को दर्शाती हैं।
अगले 10 वर्षों तक जारी रहेगी खुदाई
झा ने बताया कि उन्होंने शनिवार को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सचिव से मुलाकात कर उत्खनन की प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि मंत्रालय अगले एक दशक तक बलिराजगढ़ में खुदाई जारी रखने की योजना बना रहा है। इसके साथ ही, एएसआई का एक स्थायी कार्यालय भी स्थल पर स्थापित किया जाएगा और पुरातात्विक खोजों को संरक्षित और प्रदर्शित करने के लिए एक संग्रहालय भी विकसित किया जाएगा।
संजय कुमार झा, जो परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने पहले 19 मई को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की थी। इस मुलाकात में उन्होंने बलिराजगढ़ के वैज्ञानिक उत्खनन और दीर्घकालिक संरक्षण पर चर्चा की थी। उन्होंने उत्खनन कार्य को आगे बढ़ाने में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और मधुबनी जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की। वर्तमान में यह उत्खनन कार्य छह खाइयों में किया जा रहा है।
पुरातत्वविदों का मानना है कि जारी उत्खनन से बलिराजगढ़ के ऐतिहासिक महत्व के बारे में और अधिक प्रमाण सामने आ सकते हैं, जिसे बिहार के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में से एक माना जाता है। भविष्य की खोजें इस प्राचीन स्थल के छिपे हुए रहस्यों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।








