Bihar Education: बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य भर में स्थापित किए गए 211 नए सरकारी डिग्री कॉलेजों में आज से कक्षाएं विधिवत शुरू हो जाएंगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड स्थित कासिल गांव से पहले शैक्षणिक सत्र का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इन कॉलेजों के शुभारंभ के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी मंगलवार को ही भागलपुर पहुंच गए थे और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
60 हजार से अधिक छात्रों को मिलेगा लाभ
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इन नवस्थापित कॉलेजों में अब तक 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश ले चुके हैं। मुंगेर विश्वविद्यालय से संबद्ध 40 से अधिक कॉलेजों में सर्वाधिक नामांकन दर्ज किए गए हैं। पहले शैक्षणिक सत्र में छह स्नातक विषयों की पढ़ाई शुरू की जा रही है, जिनमें हिंदी और इतिहास को सबसे अधिक छात्रों ने चुना है। यह पहल उन छात्रों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जिन्हें पहले उच्च शिक्षा के लिए दूरदराज के शहरों में जाना पड़ता था।






अस्थायी परिसरों से शुरू होंगी कक्षाएं
प्रत्येक डिग्री कॉलेज की स्थापना पर लगभग 15 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा। हालांकि, पहले चरण में ये संस्थान किराए के भवनों या खाली सरकारी इमारतों से संचालित होंगे, जब तक कि उनके स्थायी परिसर का निर्माण नहीं हो जाता। राज्य सरकार ने इन अस्थायी भवनों के नवीनीकरण और आवश्यक फर्नीचर व बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने पर प्रति कॉलेज 50 लाख रुपये खर्च किए हैं ताकि सुचारू रूप से कक्षाएं शुरू की जा सकें।
स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
शुरुआत में इन नए कॉलेजों में विश्वविद्यालयों से प्रतिनियुक्त शिक्षकों द्वारा अध्यापन कार्य संभाला जाएगा। सरकार ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से 3,687 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले महीनों में शैक्षणिक कार्यबल को और मजबूती मिलेगी। इन नियुक्तियों से कॉलेजों में स्थायी शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
स्थायी परिसरों का निर्माण और भूमि दान
सरकार के नियमों के अनुसार, प्रत्येक कॉलेज को अंततः ग्रामीण क्षेत्रों में पांच एकड़ और शहरी क्षेत्रों में 2.5 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इन संस्थानों का नाम उन व्यक्तियों के नाम पर रखा जाएगा, जो इनके स्थायी परिसरों के लिए भूमि दान करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि नए कॉलेज उच्च शिक्षा तक पहुंच में सुधार करेंगे, खासकर उन प्रखंडों के छात्रों के लिए जहां पहले सरकारी डिग्री संस्थान नहीं थे। इससे स्नातक की पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम हो जाएगी और स्थानीय स्तर पर ही शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे।








