Darbhanga Sanskrit University: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय ने अपनी शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बड़े निर्णय लिए हैं। मंगलवार को कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय की अध्यक्षता में हुई विद्वत्परिषद की बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप कई नए अध्यादेशों और विनियमों को स्वीकृति मिली। इन बदलावों से विश्वविद्यालय के शास्त्री, आचार्य, स्नातकोत्तर और पीएचडी पाठ्यक्रमों में व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।
नई शिक्षा नीति के तहत अहम बदलाव
विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ. निशिकांत ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में लगभग 20 एजेंडे रखे गए थे, जिनमें से अधिकांश लोकभवन, पटना से जारी निर्देशों से संबंधित थे। कुलसचिव सह सचिव डॉ. दिनेश झा ने गणपूर्ति की सूचना दी और वैदिक मंगलाचरण व सरस्वती पूजन के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। सबसे पहले 03 अगस्त 2024 की पिछली विद्वत्परिषद् की कार्यवाही और कार्यान्वयन रिपोर्ट को अनुमोदित किया गया। इसके बाद, स्नातक पाठ्यक्रम से संबंधित आवश्यक दिशानिर्देश और प्रवेश अध्यादेशों को भी सदस्यों ने पारित कर दिया।






बैठक में दो वर्षीय (4-सेमेस्टर) और एक वर्षीय (2-सेमेस्टर) स्नातकोत्तर (पी.जी.) पाठ्यक्रमों के प्रारूप अध्यादेश एवं विनियमों को भी स्वीकृति मिली। वर्ष 2026 से पीएचडी उपाधि प्रदान करने हेतु न्यूनतम मानक और प्रक्रिया के एकीकृत अध्यादेश एवं विनियमों को भी अनुमोदित कर दिया गया है। आचार्य पाठ्यक्रम के अध्यादेश और विनियमावली भी 2026 से प्रभावी होंगे।
समर्थ पोर्टल से बदलेगी कार्यप्रणाली
दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय 2026-27 सत्र से समर्थ पोर्टल के माध्यम से सभी शैक्षणिक कार्यों का संपादन करेगा। इस पर सभी सदस्यों ने आम सहमति जताई। समर्थ पोर्टल के लिए विभाग और महाविद्यालय-वार छात्रों के सीटों का निर्धारण भी किया गया है। साथ ही, दो वर्षीय उपशास्त्री के संशोधित पाठ्यक्रम को भी अनुमोदित कर क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई। शिक्षाशास्त्र विभाग में आईटीईपी (ITEP) पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी आमसहमति बनी।
कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने बैठक में कहा, “हम विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ये सुधार छात्रों के भविष्य को संवारने में अहम भूमिका निभाएंगे।”
कला, संगीत और व्यावसायिक शिक्षा पर भी जोर
बैठक में धर्मशास्त्र विभागाध्यक्ष सह शोध प्रभारी प्रो. दिलीप कुमार झा ने ललित कला एवं संगीत विभाग को फिर से सक्रिय करने का मुद्दा उठाया। कुलपति प्रो. पाण्डेय ने इस पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है। वहीं, सिवान के एक प्रधानाचार्य ने व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। पदोन्नति के लिए संकायाध्यक्षों द्वारा तैयार की गई विषय विशेषज्ञों की सूची को भी अनुमोदित कर दिया गया, जिसके बाद अग्रिम कार्यवाही के लिए कुलपति को अधिकृत किया गया। द्विवर्षीय संशोधित शिक्षाशास्त्री पाठ्यक्रम को भी परिषद की हरी झंडी मिल गई। इसके अतिरिक्त, 26 नवंबर 2024 और 15 अप्रैल 2026 की परीक्षापरिषद् की कार्यवाही को भी अनुमोदित किया गया।
इस महत्वपूर्ण बैठक में संकायाध्यक्षों में प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, प्रो. शिवलोचन झा, डॉ. शम्भुशरण तिवारी और विभागाध्यक्षों में डॉ. सीताचरण झा, डॉ. रामनिहोरा राय, डॉ. संतोष पासवान, डॉ. धीरज कुमार पाण्डेय, डॉ. ध्रुव मिश्र उपस्थित थे। विभिन्न अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य भी सदस्य के रूप में मौजूद रहे। डीएसडब्लू प्रो. पुरेन्द्र वारिक ने सभी सदस्यों का स्वागत किया। शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग के लिए ओएसडी शैक्षणिक डॉ. रामसेवक झा, डॉ. छविलाल न्यौपाने, डॉ. गोपाल कुमार झा, गोपाल उपाध्याय, आकाश कुमार और सतीश शर्मा भी उपस्थित थे।








