Darbhanga News: दरभंगा जिले के जाले क्षेत्र स्थित महाकवि कालिदास सूर्यदेव महाविद्यालय (एमकेएस कॉलेज), त्रिमुहान चंदौना में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर लगे नेम प्लेट से उर्दू भाषा में कॉलेज का नाम हटा दिया गया है, जिस पर उर्दू प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे बिहार की दूसरी राजकीय भाषा उर्दू की घोर उपेक्षा बताते हुए दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
पहले एमकेएस कॉलेज के मुख्य द्वार पर हिंदी, मैथिली और उर्दू तीनों भाषाओं में महाविद्यालय का नाम अंकित था। हालांकि, अब जो नया नेम प्लेट लगाया गया है, उस पर केवल हिंदी और मैथिली में ही कॉलेज का नाम और पता दर्ज है। इस बदलाव ने अल्पसंख्यक समुदाय और उर्दू भाषी छात्रों में गहरी निराशा पैदा की है।






कॉलेज प्रशासन पर पक्षपात का आरोप, कुलपति से शिकायत
इस मामले को लेकर युवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव सैयद तनवीर अनवर, इमामुल हक इमाम, नौशाद आलम, शमीम अहमद राइन और एजाज अनवर ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी से मुलाकात की। इन सभी ने कुलपति को बताया कि बिहार में उर्दू को दूसरी राजकीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। इसलिए, महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर हिंदी और मैथिली के साथ उर्दू में भी नाम अंकित होना अनिवार्य है। उन्होंने इस गंभीर चूक पर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
उर्दू प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा, ‘यह बिहार की दूसरी राजकीय भाषा की उपेक्षा है। नेम प्लेट से उर्दू हटाए जाने से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं और उर्दू भाषी छात्रों में निराशा का माहौल है।’
छात्रों और समुदाय में गहरा असंतोष
जाले क्षेत्र संख्या-1 के जिला पार्षद फरहत हैदर और समाजसेवी जुलकरनैन ने भी एमकेएस कॉलेज प्रशासन पर उर्दू भाषा के साथ पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उनका स्पष्ट कहना है कि इस कदम से अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं, और उर्दू बोलने वाले विद्यार्थियों में भविष्य को लेकर एक तरह की हताशा का माहौल बना है। इस पूरे प्रकरण पर समाचार लिखे जाने तक कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी, जिससे असंतोष और गहराता जा रहा है।








