Bihar Bypass Project: बिहार में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने और शहरी क्षेत्रों को भीषण जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में सात नए बाइपास का निर्माण कार्य इसी साल के अंत तक शुरू होने की संभावना है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होंगे और आवागमन बेहद सुगम हो जाएगा। यह Bihar बाइपास प्रोजेक्ट राज्य की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगा।
इन 7 जगहों पर बनेंगे नए बाइपास, मिलेगी जाम से राहत
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन सात जगहों पर ये बाइपास बनाए जाएंगे, उनमें अरवल, मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोनो, झाझा, नरगंजो और भैरोगंज शामिल हैं। इन बाइपास के बनने से शहरी इलाकों में वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे स्थानीय यातायात पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।






NH-333A और NH-139 पर खास परियोजनाएं
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग 333ए पर प्रस्तावित छह बाइपास की कुल लंबाई 19.450 किलोमीटर होगी। इन बाइपास के साथ ही इसी राजमार्ग के दो डीएलपी मुक्त खंडों का भी दो लेन प्लस पक्के शोल्डर मानक के अनुसार निर्माण किया जाएगा, जिनकी कुल लंबाई 21.821 किलोमीटर है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग 139 पर नौबतपुर-हरिहरगंज रूट में अरवल बाइपास का निर्माण फोर लेन एक्सेस कंट्रोल मानक के अनुरूप होगा।
- अरवल बाइपास: नौबतपुर-हरिहरगंज रूट पर NH-139 के किलोमीटर 54.200 से 66.500 तक, करीब 12 किलोमीटर लंबा। यह परियोजना ईपीसी मोड (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) के तहत विकसित की जाएगी।
- NH-333A पर 6 बाइपास: मांगोबंदर, केंदुआ, टोलसोनो, झाझा, नरगंजो और भैरोगंज। इनकी कुल लंबाई 19.450 किलोमीटर होगी।
यात्रा का समय बचेगा, प्रदूषण भी होगा कम
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद संबंधित शहरों और कस्बों में जाम की समस्या में कमी आएगी। लंबी दूरी की गाड़ियों को शहरों के अंदर नहीं जाना पड़ेगा। इससे यात्रा का समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।’
इन बाइपास के निर्माण से लोगों को जाम से मुक्ति मिलेगी और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। मालवाहक और यात्री गाड़ियों की आवाजाही अधिक तेज और सुरक्षित हो सकेगी। यह परियोजनाएं न केवल दैनिक यात्रियों के लिए सुविधा लाएंगी बल्कि बिहार के व्यापार और उद्योग को भी नई रफ्तार देंगी, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।








