Madhubani Hospital News: बिहार के मधुबनी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। जयनगर अनुमंडल अस्पताल में शुक्रवार रात इलाज में कथित लापरवाही के कारण एक पांच वर्षीय मासूम की जान चली गई। बच्चे की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर तोड़फोड़ की, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ा। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।
बिहार के मधुबनी में अस्पताल की खौफनाक लापरवाही! 5 साल के बच्चे की मौत, मचा हाहाकार
Madhubani Hospital Negligence: बिहार के मधुबनी जिले के जयनगर अनुमंडल अस्पताल में शुक्रवार रात एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत के बाद जबरदस्त बवाल मच गया। परिजनों और ग्रामीणों ने इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर तोड़फोड़ की। इस घटना के बाद पूरा अस्पताल पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।






मृतक बच्चे की पहचान परवा गांव के वार्ड-11 निवासी पप्पू पासवान के पांच वर्षीय बेटे पाटिक पासवान के रूप में हुई है। परिजनों का दावा है कि बच्चे को सांप ने डस लिया था, जिसके बाद उसे तुरंत जयनगर अनुमंडल अस्पताल लाया गया।
अस्पताल में नहीं थी सर्पदंश की दवा, डॉक्टर ने लौटाया
परिजनों ने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में सांप काटने की दवा (सर्पदंश की दवा) उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इस दौरान बच्चे के परिजन लगातार डॉक्टर से इलाज शुरू करने और उसकी जान बचाने की गुहार लगाते रहे। हालांकि, समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण बच्चे की अस्पताल में ही मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि अगर तत्काल इलाज शुरू हो जाता तो मासूम की जान बच सकती थी।
आक्रोशित भीड़ ने की तोड़फोड़, पुलिस बल तैनात
बच्चे की मौत की खबर फैलते ही परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए परिसर में जमकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। सूचना मिलते ही डीएसपी सदानंद कुमार और थानाध्यक्ष रमण कुमार बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अस्पताल परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस अधिकारी आक्रोशित परिजनों को समझाने-बुझाने और माहौल शांत कराने में जुटे थे।
सिविल सर्जन ने इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘अस्पताल में सर्पदंश की दवा उपलब्ध रहनी चाहिए। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।’
यह घटना मधुबनी के स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जहां एक बच्चे को समय पर जीवन रक्षक दवा न मिलने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी। अब सभी की निगाहें सिविल सर्जन द्वारा घोषित जांच के नतीजों और दोषी पाए जाने वालों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
अस्पताल में नहीं मिली सर्पदंश की दवा, मासूम ने तोड़ा दम
परवा गांव के वार्ड-11 निवासी पप्पू पासवान के पांच वर्षीय बेटे पाटिक पासवान को सांप ने डस लिया था। परिजन उसे तुरंत जयनगर अनुमंडल अस्पताल लेकर पहुंचे। परिवार का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में सर्पदंश की दवा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इस दौरान परिजन लगातार बच्चे का इलाज शुरू करने और उसकी जान बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर उपचार न मिलने के कारण अस्पताल में ही मासूम पाटिक की मौत हो गई। परिजनों का साफ कहना है कि यदि बच्चे को तत्काल इलाज मिल जाता, तो उसकी जान बच सकती थी।
परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में सर्पदंश की दवा उपलब्ध नहीं है और बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
परिजनों का कहना है कि यदि तत्काल इलाज शुरू किया जाता तो बच्चे की जान बच सकती थी।
आक्रोशित भीड़ ने की तोड़फोड़, पुलिस छावनी बना अस्पताल
बच्चे की मौत की खबर फैलते ही परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश बेकाबू हो गया। उन्होंने चिकित्सक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डीएसपी सदानंद कुमार और थानाध्यक्ष रमण कुमार तत्काल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। माहौल को शांत करने के लिए पुलिस अधिकारी लगातार परिजनों और आक्रोशित लोगों से बातचीत कर रहे थे। अस्पताल परिसर पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।
सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई
इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए सिविल सर्जन ने कहा है कि अस्पताल में सर्पदंश की दवा हर हाल में उपलब्ध रहनी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के आदेश दिए हैं। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि ऐसी दुखद पुनरावृत्ति न हो।
सिविल सर्जन ने कहा कि अस्पताल में सर्पदंश की दवा उपलब्ध रहनी चाहिए। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।








