Bihar Municipal Workers Strike: पूरे बिहार में नगर निकायों के सफाईकर्मियों और ड्राइवरों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है। हजारों कर्मचारी काम पर नहीं लौटे हैं, जिससे शहरों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। गली-मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर कचरे का अंबार लग गया है। इस भयावह गंदगी से उठती बदबू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, वहीं संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है।
पटना का हाल: FIR और रात में सफाई
राजधानी पटना में पांच हजार से अधिक सफाईकर्मी इस हड़ताल में शामिल हैं। नगर निगम ने कचरा उठाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन हड़ताली कर्मचारी दूसरे कर्मियों को काम करने से रोक रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए पटना नगर निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने का निर्देश दिया है। कई इलाकों में पुलिस की मौजूदगी में कचरा उठाया जा रहा है, ताकि किसी भी तरह के विरोध से बचा जा सके। विरोध से बचने के लिए, रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है।






नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने सभी सफाई निरीक्षकों और पर्यवेक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्थायी, दैनिक और आउटसोर्सिंग एजेंसी के सभी कर्मियों की बायोमेट्रिक और मैनुअल उपस्थिति दर्ज की जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि बिना अनुमति अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। इसके साथ ही, प्रत्येक वार्ड में 15 से 20 कर्मियों की अतिरिक्त टीम बनाकर सफाई कार्य कराने का निर्देश भी दिया गया है।
नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा, “निगम के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी यूनियन की सभी मांगें पहले ही मान ली गई हैं। बाकी मांगों को भी सरकार के पास भेज दिया गया है। जनहित को देखते हुए हड़ताल खत्म करने की अपील है।”
अन्य शहरों में भी बदतर हालात
दरभंगा में भी सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जहां करीब 1500 सफाईकर्मी तीसरे दिन भी हड़ताल पर हैं। शहर में रोजाना लगभग 10 टन कचरे का उठाव होता है, लेकिन पिछले तीन दिनों से सफाई पूरी तरह ठप है। नगर निगम परिसर में धरना दे रहे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और समान काम के बदले समान वेतन सहित अपनी तीन सूत्री मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।
नालंदा के बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्र में भी स्थिति भयावह है। करीब 1300 सफाईकर्मी निगम के मुख्य गेट पर धरना दे रहे हैं। रोजाना करीब 250 टन कचरा उठता था, जो हड़ताल के कारण पूरी तरह बंद है। शहर के कई इलाकों में कचरे का अंबार लगा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी हो रही है। सुपौल नगर परिषद क्षेत्र में भी सफाईकर्मियों की हड़ताल जारी है। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद की ओर से अभी तक कोई प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे समस्या लगातार बढ़ रही है।
बीमारियों का बढ़ता खतरा और प्रशासन की अपील
लगातार तीन दिनों से सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण शहरों में गंदगी का स्तर खतरनाक हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कचरा जमा रहने से संक्रमण और संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था सामान्य करने की कोशिश में जुटा है, जबकि हड़ताली कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। नगर निगम प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों से जनहित में काम पर लौटने की अपील की है। फिलहाल, इस Bihar Municipal Workers Strike का असर पूरे राज्य में आम लोगों के दैनिक जीवन पर साफ दिखाई दे रहा है और स्थिति कब सुधरेगी, यह कहना मुश्किल है।








