Bihar Birth Death Registration: जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े नियमों में अब बड़ा बदलाव आया है। लोकसभा में शुक्रवार, 31 जुलाई को जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक 2026 को हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा के पारित कर दिया गया। इस नए कानून के तहत बिहार समेत पूरे देश में जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में देरी होने पर पहले से अधिक सख्त प्रावधान लागू होंगे। यह बदलाव आम जनता के लिए पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना सकता है, खासकर देर से आवेदन करने वालों के लिए।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण के बदले नियम: क्या कहते हैं नए प्रावधान?
संशोधित विधेयक में देरी से जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण के लिए कई नए नियम जोड़े गए हैं। अब यदि पंजीकरण में एक साल से अधिक लेकिन दो साल के भीतर की देरी होती है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उपमंडलीय मजिस्ट्रेट (SDM), या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। ये अधिकारी सत्यापन के बाद ही पंजीकरण का आदेश दे सकेंगे।






वहीं, अगर पंजीकरण में दो साल से भी अधिक की देरी हो जाती है, तो ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश प्राप्त करना आवश्यक होगा। पहले के नियमों में एक साल के बाद किसी भी समय तक संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपमंडलीय मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा नियुक्त कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश ही पर्याप्त था। दो साल से अधिक की देरी के लिए कोई अलग से प्रावधान नहीं था, जिसे अब कठोर बना दिया गया है।
हंगामेदार सत्र में पारित हुआ महत्वपूर्ण विधेयक
यह महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे और शोरगुल के बीच पारित किया गया। सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू होते ही विपक्षी सदस्य 20 जुलाई को संसद भवन के पास प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने और आदेश देने वाले का नाम बताने की मांग करते हुए हंगामा करने लगे। समाजवादी पार्टी के सदस्य अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी शोरगुल कर रहे थे।
पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने कई बार सदस्यों से शांत रहने और कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की, लेकिन शोरगुल जारी रहा। इसी बीच, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। विधेयक पेश होने के बाद पीठासीन अधिकारी ने चर्चा के लिए सदस्यों को पुकारा, लेकिन हंगामे के कारण कोई भी सदस्य अपनी बात नहीं रख सका। इसके बाद विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पर कहा, “विपक्षी सदस्यों ने इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया और वे सदन के बाहर जाकर कहेंगे कि बिना चर्चा के विधेयक पारित कराए जा रहे हैं। विपक्षी सदस्यों का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बारे में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में भी चर्चा की गई थी, लेकिन विपक्षी सदस्य सहयोग नहीं कर रहे हैं। सरकार आगे भी विधेयक लाएगी और विपक्षी सदस्य तब भी हंगामा करेंगे, यह अच्छा नहीं होगा। जनता इसके लिए उनसे जवाब मांगेगी।”
पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना ही विधेयक पारित करना पड़ा, जो एक गलत परंपरा है। उन्होंने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और कार्यवाही में सहयोग करने की अपील की, लेकिन जब इसका कोई असर नहीं हुआ तो सदन की कार्यवाही सोमवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इस नए कानून से जन्म और मृत्यु के पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन साथ ही देर से आवेदन करने वाले नागरिकों को अब अधिक औपचारिकताओं का सामना करना पड़ेगा।








