Prashant Kishor: बिहार में बांकीपुर उपचुनाव के बीच राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान उनके पार्टी कार्यकर्ताओं को बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में लिया गया। पीके ने इस कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए पुलिस की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं, जिससे चुनावी माहौल गरमा गया है।
प्रशांत किशोर के अनुसार, नौबतपुर, फतुहा, कंकड़बाग और अन्य इलाकों से कई कार्यकर्ताओं को डिटेन किया गया। उन्होंने बताया कि ज्यादातर गिरफ्तारियां सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने कीं और हिरासत में लिए गए लोगों को गिरफ्तारी का कोई कारण भी नहीं बताया गया। उन्होंने इस मामले की गहन जांच की मांग करते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।






पुलिस की भूमिका पर पीके ने उठाए गंभीर सवाल
प्रशांत किशोर ने पुलिस की प्राथमिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को अपराध, चोरी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को छोड़कर पुलिस राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाईयों में शामिल होकर चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। पीके ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि इन लोगों ने कोई कानून नहीं तोड़ा था, तो उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?
“पुलिस को अपराध, चोरी, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन इसके बजाय राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई कर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे मामलों की जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।”
18 लोग हिरासत में, 90 वर्षीय बुजुर्ग को भी नहीं बख्शा
पीके ने जानकारी दी कि कुल 18 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन्होंने जक्कनपुर थाना इलाके का विशेष जिक्र करते हुए बताया कि वहां से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें 90 वर्षीय फेकू पासवान भी शामिल थे, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रही। प्रशांत किशोर ने हिरासत में लिए गए कई अन्य कार्यकर्ताओं के नाम भी उजागर किए और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
प्रशांत किशोर ने पुलिस से स्पष्टीकरण की मांग करते हुए पूछा कि हिरासत में लिए गए लोगों को किस आधार पर गिरफ्तार किया गया और बाद में किन वजहों से रिहा किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिन पुलिस पदाधिकारियों ने बिना उचित आधार के लोगों को हिरासत में लिया, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पीके ने पुलिस से अपनी कार्रवाई का आधार स्पष्ट करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा।








