Darbhanga Civil Court: दरभंगा सिविल कोर्ट में एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। यहां मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) बनकर फर्जी आई कार्ड के सहारे प्रशिक्षण ले रहे दो युवकों सहित एक अपर लोक अभियोजक (एपीपी) को गिरफ्तार किया गया है। यह पूरा मामला नौकरी के नाम पर 6-6 लाख रुपए की ठगी और न्यायालय की गोपनीय जानकारी लीक होने के खतरे से जुड़ा है, जिस पर दरभंगा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है।
फर्जी आई कार्ड पर MTS ट्रेनिंग और APP की संलिप्तता
न्यायालय के आदेश के बाद दरभंगा पुलिस ने लहेरियासराय थाना में कांड संख्या 450/26 दर्ज किया। प्रभारी सदर एसडीपीओ एसके सुमन ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि व्यवहार न्यायालय में कुछ लोग फर्जी आई कार्ड लगाकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं और उन्हें एक एपीपी प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस सूचना पर लहेरियासराय थानाध्यक्ष अमित कुमार और दारोगा पीयूष कुमार दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया। दरोगा पीयूष कुमार के आवेदन पर मामला दर्ज किया गया, जिसमें रजनीश कुमार को अनुसंधानक बनाया गया है।






प्रभारी सदर एसडीपीओ एसके सुमन ने बताया, ‘लहेरियासराय थाना में कांड संख्या 450/26 दर्ज की गई है। सूचना मिलने पर कार्रवाई करते हुए एक एपीपी सहित दो आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है।’
ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा का खुलासा
गिरफ्तार किए गए मनोज कुमार और विकास कुमार यादव से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। मनोज कुमार ने बताया कि उन्हें देव नामक व्यक्ति के माध्यम से अजय उर्फ अमन से संपर्क हुआ था। वहीं, विकास कुमार यादव ने बताया कि उनका संपर्क नजीमुद्दीन के माध्यम से अजय उर्फ अमन से बना। इन दोनों युवकों ने पुलिस को बताया कि देव और नजीमुद्दीन ने उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर अजय उर्फ अमन से मिलवाया था, जिसने फर्जी आई कार्ड बनाकर दिए।
पुलिस को दिए बयान में यह भी सामने आया कि कोर्ट में एपीपी अशोक कुमार द्वारा उन्हें प्रशिक्षण दिया जाना था। अमन नामक व्यक्ति मोबाइल फोन पर कोर्ट की प्रक्रिया और कागजात से संबंधित ट्रेनिंग के निर्देश दे रहा था। जब पकड़े गए मनोज कुमार, विकास यादव और एपीपी अशोक कुमार से एमटीएस पद से संबंधित आई कार्ड, जॉइनिंग लेटर, सक्षम प्राधिकार का पत्र और अन्य कागजात मांगे गए, तो वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए। दोनों के आई कार्ड फर्जी पाए गए। कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, न्यायालय द्वारा किसी भी तरह का आई कार्ड निर्गत नहीं किया गया था, बल्कि डीएलएसए के सचिव के हस्ताक्षर की नकल कर आई कार्ड पर साइन स्कैन करवाया गया था।
गोपनीयता पर सवाल और आगे की कार्रवाई
इस मामले में एक एपीपी सहित दो आरोपी मनोज कुमार और विकास कुमार यादव को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। थानाध्यक्ष ने इस घटना की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि आरोपी नहीं पकड़े जाते, तो कोर्ट के गोपनीय पत्र दूसरे लोगों को उपलब्ध हो सकते थे, जिससे गंभीर सुरक्षा उल्लंघन का खतरा था। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापामारी कर रही है। इस घटना ने न्यायालय परिसर की सुरक्षा और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसकी गहन जांच जारी है।








