Patna High Court Divorce: वैवाहिक जीवन में मानसिक प्रताड़ना को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पति बिना किसी उचित कारण के लंबे समय तक पत्नी से अलग रहता है और उसे वैवाहिक जीवन के अधिकारों से वंचित करता है, तो इसे मानसिक क्रूरता माना जा सकता है. इस निर्णय के साथ, हाईकोर्ट ने लखीसराय फैमिली कोर्ट के एक आदेश को रद्द करते हुए 11 साल से अलग रह रहे एक दंपत्ति के मामले में पत्नी को तलाक की डिक्री प्रदान की.
यह मामला बेगूसराय की मोना कुमारी और भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त जवान सुनील कुमार से जुड़ा है. दोनों की शादी 7 मई 2007 को हुई थी और उनका एक बेटा भी है. फरवरी 2013 से दोनों अलग-अलग रह रहे थे, जिसके बाद मोना कुमारी ने तलाक के लिए लखीसराय फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की थी.

11 साल की दूरी, हाईकोर्ट का अहम फैसला
मोना कुमारी ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उनके पति सुनील कुमार उन्हें अपने साथ रखने में कोई रुचि नहीं दिखाते थे. उनके मुताबिक, पति उन पर चरित्र को लेकर आरोप लगाते थे और गाली-गलौज करते थे, जिससे उन्हें लगातार मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. पत्नी का यह भी कहना था कि उनके पति ने उनके और बच्चे के भरण-पोषण की भी कोई सुध नहीं ली.
लखीसराय फैमिली कोर्ट ने 15 जून 2024 को पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने का हवाला देते हुए मोना की तलाक याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद मोना कुमारी ने इस फैसले को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी. इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिबेक चौधरी और न्यायमूर्ति राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने की.
पति की अनुपस्थिति और न्यायिक प्रक्रिया
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पति सुनील कुमार को पेश होने के लिए कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए. कोर्ट के आदेश पर समाचार पत्रों में भी विज्ञापन प्रकाशित कराया गया, फिर भी पति हाईकोर्ट में हाजिर नहीं हुए. इन परिस्थितियों को देखते हुए, हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर मामले की सुनवाई जारी रखी.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘दोनों के बीच 2013 से वैवाहिक संबंध प्रभावी रूप से समाप्त हैं. हालांकि, केवल लंबे समय तक अलग रहने को अपने आप में तलाक का आधार नहीं माना जा सकता. लेकिन यदि पति बिना उचित कारण लंबे समय तक पत्नी से अलग रहता है और उसे वैवाहिक जीवन से वंचित रखता है, तो परिस्थितियों के आधार पर यह मानसिक क्रूरता का आधार बन सकता है.’
फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द, पत्नी को मिली राहत
खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें तलाक याचिका खारिज की गई थी. कोर्ट ने पत्नी की अपील स्वीकार करते हुए विवाह-विच्छेद की डिक्री प्रदान कर दी. इस फैसले के बाद मोना कुमारी और सुनील कुमार का वैवाहिक संबंध कानूनी रूप से समाप्त हो गया है. यह निर्णय वैवाहिक क्रूरता की परिभाषा को और स्पष्ट करता है, खासकर उन मामलों में जहां लंबे समय तक अलगाव और वैवाहिक अधिकारों से वंचित रखना शामिल हो.
यह फैसला उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा जो वैवाहिक संबंधों में लंबे समय से अलगाव और मानसिक प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं. यह बताता है कि केवल शारीरिक हिंसा ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और मानसिक उपेक्षा भी तलाक का वैध आधार हो सकती है.

