Bihar Crime: पटना: बिहार में सरकारी तंत्र को झांसा देने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के निजी सचिव (पीएस) का फर्जी परिचय देकर जेल महानिरीक्षक (आईजी) को फोन पर निर्देश देने वाले एक जालसाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह मामला पटना में सामने आया, जहां आरोपी ने खुद को मंत्री का पीएस बताकर बंदियों के स्थानांतरण की कोशिश की थी।
पुलिस ने इस शातिर अपराधी धीरज कुमार को लखीसराय से दबोचा है। धीरज अरवल के मेहंदिया थाना क्षेत्र का रहने वाला है और वर्तमान में लखीसराय की पंचवटी कॉलोनी में रहता था। उसकी गिरफ्तारी के बाद सरकारी विभागों में फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद है।






फर्जी पीएस बनकर जेल आईजी को दिए थे निर्देश
सीटी एसपी मध्य ममता कल्याणी ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि चार अगस्त 2026 को सचिवालय थाना को एक सूचना मिली थी। इस सूचना में बताया गया कि एक व्यक्ति केंद्रीय मंत्री का निजी सचिव बनकर कारा महानिरीक्षक को फोन कर रहा है। वह भागलपुर मंडल कारा में बंद कैदी भरत सिंह को बेऊर केंद्रीय कारा में स्थानांतरित करने का निर्देश दे रहा था। यह निर्देश पूरी तरह से फर्जी था और सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार करने का प्रयास था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत इसकी जांच शुरू की। पुलिस ने सबसे पहले केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह से संपर्क साधा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके निजी सचिव द्वारा ऐसा कोई फोन या निर्देश नहीं दिया गया था। इससे यह साफ हो गया कि यह एक जालसाजी का मामला है।
मंत्री ने किया था फर्जी कॉल का खंडन, फिर हुई गिरफ्तारी
कारा महानिरीक्षक के आप्त सचिव के आवेदन पर सचिवालय थाना में कांड संख्या 166/26 दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने गहन अनुसंधान शुरू किया। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी धीरज कुमार को लखीसराय से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में धीरज ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
पुलिस पूछताछ में आरोपी धीरज कुमार ने स्वीकार किया कि वह विभिन्न मंत्रियों के निजी सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों का परिचय देकर अलग-अलग सरकारी विभागों में फोन करता था। वह अपने प्रभाव का झूठा झांसा देकर सरकारी कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश करता था।
पुलिस ने आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया है। इस गिरफ्तारी से उन सभी विभागों में सतर्कता बढ़ गई है, जहां धीरज ने फर्जी कॉल किए होंगे।
सरकारी विभागों में फैला था जालसाज का नेटवर्क
धीरज कुमार की गिरफ्तारी सिर्फ एक मामले का अंत नहीं है, बल्कि यह एक बड़े फर्जीवाड़े के नेटवर्क की शुरुआत हो सकती है। उसके कबूलनामे से पता चलता है कि वह सिर्फ कारा विभाग ही नहीं, बल्कि कई अन्य सरकारी विभागों में भी मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है ताकि उसके पूरे नेटवर्क और ऐसे अन्य मामलों का पता लगाया जा सके। यह घटना सरकारी तंत्र में फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर अनुचित लाभ उठाने की कोशिश करने वाले तत्वों के लिए एक चेतावनी है।








