Bihar Kanwar Yatra: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में भक्ति और राष्ट्रप्रेम का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। बिहार के कच्ची कांवरिया पथ पर शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है, जहां हर ओर ‘बोल बम’ के जयघोष गूंज रहे हैं। इसी बीच, कोलकाता से आए शिवभक्तों का एक अनोखा जत्था सभी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यह जत्था उज्जैन के महाकालेश्वर की भव्य प्रतिमा से सजी एक विशाल कांवड़ लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ रहा है।
इस कांवड़ में 100 लीटर गंगाजल से भरा एक कलश रखा गया है, जिसे राष्ट्रध्वज तिरंगे की खूबसूरत थीम से सजाया गया है। यह अनोखी प्रस्तुति हर श्रद्धालु का मन मोह रही है और भक्ति के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति का भी संदेश दे रही है।






भक्ति और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम
कोलकाता के काशीपुर निवासी शिवभक्त रघुनाथ राय ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी वे 100 लीटर गंगाजल वाला विशाल कलश लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम जा रहे हैं। इस कांवड़ पर उज्जैन के महाकालेश्वर की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इसे बांस और मटकी की सहायता से पूरी तरह हाथों से तैयार किया गया है, जिसके निर्माण में लगभग तीन महीने का समय लगा। इस कांवड़ का कुल वजन करीब 300 किलो है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ा देता है।
रघुनाथ राय ने आगे बताया कि उनके साथ 25 से 30 शिवभक्तों का एक जत्था चल रहा है। इस विशाल कांवड़ को ले जाने में एक बार में चार लोग लगते हैं। सभी श्रद्धालु सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर निकले हैं और 10 से 12 अगस्त के बीच बाबा बैद्यनाथ पर जलाभिषेक करेंगे।
सुल्तानगंज से बाबा धाम तक ‘बोल बम’ के जयकारे
इस जत्थे के सीनियर शिवभक्त बबाई ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं। पहले वे सामान्य कांवड़ लेकर जाते थे, लेकिन वर्ष 2024 से उन्होंने विशाल कलश वाली कांवड़ यात्रा की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि इस कांवड़ को उन्होंने अपने साथियों के सहयोग से स्वयं तैयार किया है। इसे बनाने में बांस, रस्सी, तार और अन्य आवश्यक सामग्रियों का उपयोग किया गया। लगभग 20 लोगों ने तीन दिनों की कड़ी मेहनत से इस कांवड़ को अंतिम रूप दिया है।
बबाई ने कहा, “बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के बाद हम बासुकीनाथ धाम जाएंगे। इसके बाद 15 अगस्त को भूतनाथ से जल उठाकर बाबा तारकनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए रवाना होंगे। इसी कारण हमने 100 लीटर वाले कलश को राष्ट्रध्वज तिरंगे की थीम पर सजाया है।”
श्रावणी मेले में उज्जैन महाकाल की यह भव्य प्रतिमा, 100 लीटर गंगाजल से भरा तिरंगा कलश और शिवभक्तों की अटूट आस्था श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह अनोखी और विशाल कांवड़ यात्रा हर किसी को शिवभक्ति और राष्ट्रभक्ति का एक अद्भुत संदेश दे रही है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है।








