Darbhanga Sarkar Yojana: सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दरभंगा जिले के जाले प्रखंड में आयोजित सहयोग शिविरों की बदहाली सामने आई है। अगस्त माह के पहले मंगलवार को प्रस्तावित यह शिविर चेहल्लुम के कारण बुधवार को आयोजित किया गया था। लेकिन रतनपुर और कछुआ पंचायतों में लगे इन शिविरों में उम्मीद से बेहद कम लोग पहुंचे, जिससे सरकारी प्रयासों पर सवाल खड़े हो गए हैं।







जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) स्वप्निल ने कछुआ पंचायत के शिविर का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों पर जमकर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने शिविर स्थल पर जलजमाव देखकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को अनुपयुक्त स्थल चयन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
रतनपुर शिविर में क्यों नहीं पहुंचे ग्रामीण?
रतनपुर पंचायत के प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में लगे शिविर में पूरे दिन में मात्र नौ आवेदन ही प्राप्त हुए। इनमें तीन आवेदन सामाजिक सुरक्षा पेंशन से संबंधित थे, जबकि छह खाद्य उपभोक्ता विभाग से जुड़े थे। डीडीसी स्वप्निल के निर्देश पर यहां सभी विभागों के काउंटर लगाए गए थे, लेकिन बीती रात हुई बारिश के कारण ग्रामीण धान की रोपनी और खेतों के अन्य कार्यों में व्यस्त रहे, जिस वजह से शिविर में उनकी उपस्थिति नगण्य रही। लोगों का आना करीब साढ़े 11 बजे के बाद ही शुरू हो सका।
कछुआ शिविर में जलजमाव और डीडीसी का बयान
उधर, कछुआ पंचायत के प्राथमिक विद्यालय कन्या परिसर में आयोजित सहयोग शिविर की स्थिति और भी खराब थी। विद्यालय परिसर में जलजमाव के कारण लोगों को विभिन्न काउंटरों तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रतनपुर में कम उपस्थिति की खबर मिलने पर डीडीसी स्वप्निल खुद कछुआ शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे। वहां जलजमाव देखकर उन्होंने साफ शब्दों में कहा:
‘शिविर स्थल का चयन प्रखंड स्तर से किया जाता है तथा बीडीओ का प्रभार रहने के कारण अनुपयुक्त स्थल का चयन हुआ।’
कछुआ शिविर में कुल 10 आवेदन मिले, जिनमें सात विद्युत विभाग, दो सामाजिक सुरक्षा पेंशन और एक राजस्व विभाग से संबंधित थे। दोनों पंचायतों में खेती के कार्यों में व्यस्तता के चलते ग्रामीणों की भागीदारी अपेक्षा से काफी कम रही, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचाने का उद्देश्य अधूरा रह गया।
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने बढ़ाई भीड़
रतनपुर शिविर में अन्य विभागों के काउंटरों पर जहां सन्नाटा पसरा रहा, वहीं स्वास्थ्य विभाग के काउंटर पर भारी भीड़ देखने को मिली। डॉ. अमरनाथ गुप्ता ने बताया कि शाम चार बजे तक 150 से अधिक लोगों का उपचार किया गया और उन्हें निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई गईं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर चिकित्सक के समय पर नहीं पहुंचने और दवाओं की अनुपलब्धता के कारण लोग शिविर में इलाज कराने को मजबूर हुए। यह स्थिति स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर करती है, जिसके कारण सरकारी शिविरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
वार्ड 25 में सहयोग शिविर नहीं लगा
कार्यपालक पदाधिकारी व स्वच्छता कर्मियों की हड़ताल के कारण आयोजन स्थगित। कार्यपालक पदाधिकारी सहित स्वच्छता कर्मियों के हड़ताल पर रहने के कारण नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड 25 में प्रस्तावित सहयोग शिविर का आयोजन नहीं हो सका. हड़ताल के चलते शिविर स्थगित रहने से वार्ड के लाभुकों को योजनाओं से संबंधित आवेदन व अन्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाया.









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